भारत की राजधानी नई दिल्ली में इस हफ्ते BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। इस मीटिंग की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर कर रहे हैं। ईरान और इसराइल के बीच चल रही जंग और BRICS देशों के आपसी मतभेद इस मीटिंग के सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं।

BRICS बैठक में किन बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा?

इस मीटिंग का मुख्य मकसद ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार और आपसी सहयोग को बढ़ाना है। लेकिन ईरान और इसराइल के बीच जारी तनाव ने माहौल गरमा दिया है। ईरान ने मांग की है कि सभी BRICS देश मिलकर अमेरिका और इसराइल की कार्रवाइयों की निंदा करें। हालांकि, ईरान और UAE के बीच क्षेत्रीय विवाद की वजह से सभी देशों का एकमत होना मुश्किल हो रहा है, जिससे साझा बयान जारी करने में दिक्कत आ रही है।

  • बैठक की थीम: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability
  • मुख्य चर्चा: ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म्स और क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करना
  • भारत का लक्ष्य: सदस्य देशों के बीच संतुलन बनाना और विकासशील देशों का नेतृत्व करना

चीन के विदेश मंत्री क्यों नहीं आए और कौन कर रहा है प्रतिनिधित्व?

चीन के विदेश मंत्री वांग यी इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इसी हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग के दौरे पर जा रहे हैं, जिससे वांग यी वहां व्यस्त हैं। चीन की तरफ से भारत में तैनात उनके राजदूत शु फेइहोंग इस मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं।

बैठक में शामिल सदस्य और पार्टनर देश कौन हैं?

इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और यूएई जैसे सदस्य देश हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, वियतनाम और नाइजीरिया जैसे पार्टनर देश भी इस चर्चा का हिस्सा बने हैं। दक्षिण अफ्रीका के मंत्री रोनाल्ड लमोला ने उम्मीद जताई है कि इस चर्चा से शांति और आपसी तालमेल बढ़ेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

BRICS की अगली बड़ी समिट कब और कहाँ होगी?

18वीं BRICS समिट सितंबर 2026 में भारत में आयोजित होगी। कुछ सूत्रों के अनुसार यह मीटिंग 12-13 सितंबर को हो सकती है।

ईरान और यूएई के विवाद का बैठक पर क्या असर पड़ रहा है?

दोनों देशों के अलग-अलग स्टैंड की वजह से सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे एक साझा बयान (Joint Statement) जारी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।