नई दिल्ली में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बड़ी बैठक शुरू हुई है. लेकिन इस मीटिंग में ईरान और UAE के बीच तनातनी बढ़ गई है. ईरान चाहता था कि अमेरिका और इसराइल की हरकतों की कड़ी निंदा की जाए, लेकिन UAE ने इस पर रोक लगा दी. अब इस विवाद की वजह से सभी देशों के बीच एक साझा बयान निकालना मुश्किल हो गया है.
ईरान ने UAE पर क्या आरोप लगाए हैं?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने मीटिंग के दौरान सीधे तौर पर UAE पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि UAE ने अमेरिका और इसराइल को अपने बेस, हवाई क्षेत्र और खुफिया जानकारी मुहैया कराई, जिससे ईरान पर हमले हुए. ईरान ने इन हरकतों को गैरकानूनी हमला और युद्ध भड़काने वाला बताया है. ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजেম गरिबबादी ने भी कहा कि एक सदस्य देश (UAE) ईरान के खिलाफ भाषा का इस्तेमाल करना चाहता है, जिससे BRICS की एकता पर बुरा असर पड़ सकता है. ईरान ने साफ कर दिया कि वह किसी भी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा.
भारत ने विवाद को सुलझाने के लिए क्या कहा?
इस मीटिंग की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि इस समय बातचीत और डिप्लोमेसी सबसे ज्यादा जरूरी है. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे समुद्री रास्तों से व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहना चाहिए. उन्होंने एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया और कहा कि BRICS को दुनिया में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना होगा. भारत ने किसी भी देश की सीधे तौर पर निंदा करने के बजाय बातचीत के रास्ते को अपनाने की सलाह दी है.
BRICS मीटिंग में कौन-कौन से देश शामिल हुए?
नई दिल्ली में आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में कई देशों के बड़े प्रतिनिधि शामिल हुए हैं:
- भारत: एस जयशंकर (चेयर)
- ईरान: अब्बास अराक्ची
- UAE: खलीफा बिन शहिन अल मरार
- रूस: सर्गेई लावरोव
- चीन: जू फीहोंग
- ब्राजील: मौरो विएरा
- दक्षिण अफ्रीका: रोनाल्ड लमोला
- मिस्र: बद्र अब्देलट्टी
- इथियोपिया: गेदियन टिमोथियोस
- इंडोनेशिया: सुगियोनो
Frequently Asked Questions (FAQs)
BRICS देशों के बीच साझा बयान क्यों नहीं निकल पाया?
BRICS में फैसले सबकी सहमति से लिए जाते हैं. ईरान चाहता था कि अमेरिका और इसराइल की निंदा की जाए, लेकिन UAE ने इस पर सहमति नहीं दी, जिससे विवाद बढ़ गया.
ईरान और UAE के बीच यह तनाव क्यों शुरू हुआ?
ईरान का आरोप है कि UAE ने अमेरिका और इसराइल को अपने बेस और खुफिया जानकारी दी जिससे ईरान पर हमले हुए. यह विवाद 28 फरवरी से चल रहे व्यापक संघर्ष का हिस्सा है.
