नई दिल्ली में BRICS देशों की एक अहम बैठक हुई, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और जंग को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई। इस वजह से सभी देशों की तरफ से कोई साझा बयान जारी नहीं किया जा सका। भारत ने इस पूरी बैठक की अध्यक्षता की थी।
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BRICS बैठक में क्या हुआ और क्यों नहीं निकला कोई नतीजा?
यह बैठक 23 और 24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हुई थी। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि सदस्य देशों के बीच पश्चिम एशिया के विवाद को लेकर आम सहमति नहीं बन सकी। नियमों के मुताबिक, जब सभी देश एक बात पर राजी नहीं होते, तो साझा बयान (Joint Statement) जारी नहीं किया जाता।
- अध्यक्षता: इस मीटिंग की अध्यक्षता सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा ने की।
- असहमति की वजह: आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, विवाद में शामिल देशों के बीच विचारों में बहुत बड़ा अंतर था। इसमें UAE के रुख का भी जिक्र किया गया है।
- विकल्प: साझा बयान की जगह एक “चेयर स्टेटमेंट” जारी किया गया, जिसमें अलग-अलग देशों के नजरिए को संक्षेप में बताया गया।
किन मुख्य मुद्दों पर हुई चर्चा और भारत का क्या स्टैंड है?
बैठक के दौरान मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) के कई गंभीर मुद्दों पर बात हुई। भारत ने इस मौके पर अपनी बात मजबूती से रखी और दुनिया में शांति की अपील की।
- फिलिस्तीन मुद्दा: भारत ने फिलिस्तीन मामले में ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ यानी दो देशों के समाधान का समर्थन किया।
- गाजा और मानवीय मदद: गाजा की स्थिति और वहां UNRWA की भूमिका व मानवीय सहायता पहुंचाने पर चर्चा हुई।
- आतंकवाद: सभी सदस्यों ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति पर बात की।
- अन्य विवाद: लेबनान में युद्धविराम, सीरिया का पुनर्निर्माण, यमन में राजनीतिक समझौता, इराक की स्थिरता, लीबिया की राजनीतिक प्रक्रिया और सूडान के मानवीय संकट पर भी विचार साझा किए गए।
आगे की योजना क्या है?
भले ही इस बार साझा बयान नहीं निकल पाया, लेकिन सदस्य देशों ने भविष्य में फिर से मिलने का फैसला किया है। अब साल 2027 में चीन की अध्यक्षता में इस बैठक का अगला दौर होगा, जहां इन मुद्दों पर दोबारा चर्चा की जाएगी।