भारत में होने वाले 18वें BRICS+ समिट को लेकर देश में राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को देखते हुए इस समिट को समय से पहले बुलाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि भारत को इस संकट को सुलझाने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक पहल करनी चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।

पश्चिम एशिया संकट और भारत की भूमिका पर क्या है विवाद?

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारत इस समय BRICS का अध्यक्ष है, फिर भी सरकार ने ईरान पर हुए हमलों पर चुप्पी साध रखी है। विपक्ष ने इसे भारत के सभ्यतागत मूल्यों के साथ विश्वासघात और नैतिक कायरता करार दिया है।

BRICS समिट और मौजूदा हालात से जुड़े मुख्य आंकड़े

भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है और नई दिल्ली में इसकी मुख्य बैठक होनी है। वर्तमान स्थिति को समझने के लिए कुछ जरूरी जानकारी नीचे दी गई है:

  • सदस्य देश: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, ईरान और UAE इसके मुख्य सदस्य हैं।
  • भारत का रुख: विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि BRICS के भीतर आम सहमति बनाना मुश्किल है क्योंकि इसके कुछ सदस्य सीधे तौर पर युद्ध में शामिल हैं।
  • ईरान की अपील: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी से फोन पर बात कर युद्ध रुकवाने में स्वतंत्र भूमिका निभाने का आग्रह किया है।
  • सऊदी अरब का एक्शन: तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरान के सैन्य अताशे और दूतावास के स्टाफ को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार भारत सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बयान दिया है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है और इसे केवल कूटनीति से ही सुलझाया जा सकता है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.