नई दिल्ली में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बड़ी बैठक शुरू हुई है। लेकिन इस बार भारत के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं लग रही है। पूर्व राजनयिक राजीव भाटिया ने भारत की इस अध्यक्षता को ‘कांटों का ताज’ बताया है क्योंकि दुनिया के हालात, खासकर मिडिल ईस्ट में काफी तनावपूर्ण हैं।

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भारत की अध्यक्षता क्यों है इतनी मुश्किल?

राजीव भाटिया के मुताबिक, इस बार की बैठक बहुत जटिल है क्योंकि BRICS के तीन सदस्य देश—ईरान, UAE और सऊदी अरब—एक ही संघर्ष में उलझे हुए हैं। फरवरी के आखिर से ऐसी स्थिति बनी हुई है जहाँ न तो पूरी तरह युद्ध है और न ही शांति। इसके अलावा, जिस दिन नई दिल्ली में यह बैठक हो रही है, उसी दिन बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच चर्चा हो रही है, जिससे दबाव और बढ़ गया है।

बैठक में किन मुख्य मुद्दों पर होगी बात?

नई दिल्ली में हो रही इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, मिडिल ईस्ट के झगड़े और स्थानीय मुद्राओं (local currencies) में व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। बैठक से जुड़ी कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • भारत का पक्ष: विदेश मंत्री S. Jaishankar ने बताया कि भारत ने अब तक 80 से ज़्यादा BRICS मीटिंग्स आयोजित की हैं ताकि आपसी सहयोग बढ़े।
  • चीन की मौजूदगी: चीन के विदेश मंत्री Wang Yi इस बैठक में नहीं आए क्योंकि वे Trump-Xi समिट में व्यस्त हैं। उनकी जगह चीन के राजदूत Xu Feihong शामिल हुए हैं।
  • ईरान की मांग: ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने बैठक में हिस्सा लिया और BRICS से मांग की कि अमेरिका और इसराइल की ‘अवैध आक्रामकता’ की निंदा की जाए।
  • दक्षिण अफ्रीका का नजरिया: मंत्री Ronald Lamola ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार के लिए BRICS की भूमिका अब पहले से ज़्यादा ज़रूरी हो गई है।

मिडिल ईस्ट के तनाव का भारत पर क्या असर होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपने हितों को बचाने के लिए बहुत सावधानी से चलना होगा। पूर्व राजदूत संजय सुधीर ने बताया कि UAE का OPEC छोड़ने का फैसला भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अच्छा साबित हुआ। वहीं, पूर्व राजनयिक K.P. Fabian ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण समुद्री सुरक्षा खराब हुई है, ऐसे में चाबहार पोर्ट जैसे अपने आर्थिक संपत्तियों को बचाने के लिए भारत को तेहरान के साथ बातचीत जारी रखनी होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

राजीव भाटिया ने भारत की BRICS अध्यक्षता को ‘कांटों का ताज’ क्यों कहा?

उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि BRICS के सदस्य देश ईरान, सऊदी अरब और UAE आपस में विवादों में फंसे हैं, जिससे भारत के लिए समूह का नेतृत्व करना और संतुलन बनाना बहुत मुश्किल हो गया है।

क्या चीन के विदेश मंत्री इस बैठक में शामिल हुए हैं?

नहीं, चीन के विदेश मंत्री Wang Yi बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक की वजह से नहीं आए। उनकी जगह चीन के राजदूत Xu Feihong ने हिस्सा लिया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.