Bristol से रवाना हुआ Kate जहाज, इसराइल के गाजा नाकेबंदी को तोड़ने के लिए 12 एक्टिविस्ट निकले सफर पर.

Nura Basta17 August 20262 min read58 viewsWorld
Bristol से रवाना हुआ Kate जहाज, इसराइल के गाजा नाकेबंदी को तोड़ने के लिए 12 एक्टिविस्ट निकले सफर पर.

गाजा की सख्त घेराबंदी को तोड़ने और वहां के लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए ब्रिटेन के ब्रिस्टल हार्बर से एक नया अभियान शुरू हुआ है। 17 अगस्त 2026 को सोमवार के दिन "Kate" नाम का एक जहाज कुल 12 एक्टिविस्टों के साथ रवाना हुआ। इस पानी के जहाज को आयरलैंड के नाविक Fiacc O Brolchain चला रहे हैं। जब यह जहाज Hannover Quay से निकला तो वहां मौजूद लोगों ने ताली बजाकर और हूटिंग करके इनका हौसला बढ़ाया। यह पूरी यात्रा ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला मिशन का एक अहम हिस्सा है, जिसका मुख्य मकसद गाजा के जरूरतमंद लोगों तक खाना, दवाइयां और ईंधन पहुंचाना है। इस इलाके में इसराइल की तरफ से लंबे समय से पूरी तरह से रोक लगाई गई है, जिससे वहां के आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पुराने अनुभव और कूटनीतिक कोशिशें

इस खतरनाक सफर में हिस्सा लेने वाले लोगों में कानूनी मामलों के जानकार Frank Romano और एक्टिविस्ट Colm Byrne भी शामिल हैं। इन दोनों का इतिहास पहले भी ऐसे ही समुद्री अभियानों में शामिल होने का रहा है। उनका कहना है कि पिछले अभियानों के दौरान इसराइली सेना ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया था। यह रवानगी ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के समर्थन से संघर्षविराम को लेकर उच्च स्तर पर बातचीत चल रही है। हालांकि, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu इस रोडमैप का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक हमास को पूरी तरह से खत्म या हथियार डालने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, तब तक इसराइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।

अधिकारियों का रुख और पिछला इतिहास

गाजा की नाकेबंदी तोड़ने के ऐसे प्रयास पहले भी कई बार किए गए हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इसराइली रक्षा बलों यानी IDF ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में ही इन जहाजों को रोक लिया। इसी साल यानी मई 2026 में कुल 54 नावों के एक बड़े काफिले को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया था। उस दौरान कई एक्टिविस्टों को हिरासत में लिया गया था, जिन्होंने बाद में जेल में मारपीट और उनका सामान छीनने के आरोप लगाए थे। दूसरी तरफ, इसराइली प्रशासन का हमेशा से यह पक्ष रहा है कि उनके द्वारा की जाने वाली ये कार्रवाईयां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में होती हैं। उनका मानना है कि देश की सुरक्षा को खतरे से बचाने के लिए इस तरह के कदम उठाना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के खतरे को समय रहते रोका जा सके।

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