Strait of Hormuz में जारी तनाव के बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने खाड़ी देशों (GCC) के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई है। इन दोनों शक्तिशाली देशों ने ईरान द्वारा समुद्री मार्ग में बाधा डालने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है। 2 अप्रैल 2026 को Kuwait News Agency ने जानकारी दी कि दुनिया के 40 से ज़्यादा देश इस मुद्दे पर एक साथ मिलकर ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की योजना बना रहे हैं। यह स्थिति उन प्रवासियों और व्यापार के लिए चिंताजनक है जो समुद्र के रास्ते होने वाली सप्लाई पर निर्भर हैं।

ब्रिटेन और फ्रांस ने इस मामले पर क्या कड़े कदम उठाए हैं?

ब्रिटेन ने ईरान पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने का आरोप लगाया है। ब्रिटिश विदेश मंत्री Yvette Cooper ने साफ तौर पर कहा है कि ईरान को Strait of Hormuz को बिना किसी शर्त के तुरंत खोल देना चाहिए। इस मामले में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और UAE समेत 40 से ज़्यादा देश शामिल हुए हैं। इस मीटिंग के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने पर चर्चा की गई।
  • UN के इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के साथ मिलकर फंसे हुए जहाजों और नाविकों को छुड़ाने पर काम शुरू हुआ।
  • फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा कि इस रास्ते को जबरदस्ती खोलना मुश्किल है, इसलिए ईरान के साथ बातचीत करना ज़रूरी है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से भी इस मामले में दखल देने की मांग की गई है।

हाल के दिनों में हुए हमलों का खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ा है?

ईरान की ओर से कमर्शियल जहाजों पर लगातार हमले जारी हैं जिससे खाड़ी देशों में व्यापार और शिपिंग की गतिविधियां लगभग रुक गई हैं। पिछले 24 घंटों में Kuwait में ड्रोन हमला और Qatar के पास एक तेल टैंकर पर मिसाइल गिरने की खबर मिली है। इन हमलों का असर इराक जैसे देशों पर भी पड़ रहा है जहां तेल का उत्पादन और एक्सपोर्ट काफी कम हो गया है।

घटना की तारीख मुख्य गतिविधि
19-20 मार्च 2026 35 से ज़्यादा देशों ने ईरान के हमलों की निंदा करते हुए साझा बयान जारी किया
2 अप्रैल 2026 ब्रिटेन ने 40 देशों के साथ मिलकर बैठक की और ईरान को चेतावनी दी
2 अप्रैल 2026 Kuwait और Qatar के पास हमलों की खबर से शिपिंग रुकी

प्रवासियों के लिए यह खबर इसलिए ज़रूरी है क्योंकि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर इन रास्तों से होने वाले व्यापार पर टिकी है। अगर तनाव और बढ़ता है तो खाने-पीने की चीज़ों और तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। Bahrain इस समय सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिशों में सबसे आगे है।