Britain का बड़ा फैसला, Strait of Hormuz में फीस लगाने का विरोध, कहा इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को होगा नुकसान

Strait of Hormuz के रास्ते से जहाजों के गुजरने पर फीस लगाने की चर्चा तेज हो गई है. ब्रिटेन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है. ब्रिटेन का मानना है कि अगर यहाँ टोल या फीस ली गई, तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा.

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ का क्या रुख है?

ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने साफ कहा है कि Strait of Hormuz को बिना किसी शर्त के पूरी तरह खोलना चाहिए. ब्रिटेन ने 40 से ज्यादा देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ बैठक की है ताकि ईरान को फीस लगाने से रोका जा सके. यूरोपीय संघ (EU) ने भी इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि जहाजों के आने-जाने की आजादी बनी रहनी चाहिए और यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था के लिए जरूरी है.

ईरान की मांग और अंतरराष्ट्रीय कानून क्या है?

ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर तक की फीस मांगने का प्रस्ताव दिया है. ईरान चाहता है कि यह भुगतान उसकी अपनी करेंसी रियाल में हो. वहीं, अंतरराष्ट्रीय कानून UNCLOS के मुताबिक इस तरह के रास्तों पर जहाजों को रोकना या फीस लेना गलत है. कानूनी जानकारों का कहना है कि प्राकृतिक जलमार्गों पर पैसे लेना सदियों पुराने समुद्री नियमों के खिलाफ है.

अमेरिका और अन्य देशों की स्थिति क्या है?

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने टोल के विरोध में बात की है, लेकिन उनकी सरकार के बयानों में कुछ अंतर देखा गया है. US Central Command ने साफ किया है कि उनका नाकाबंदी का फैसला सिर्फ ईरानी पोर्ट्स और तटरेखा के लिए है, न कि पूरे Strait of Hormuz के लिए. इस पूरे मामले में ओमान, यूएई और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों की भी नजर बनी हुई है क्योंकि यह रास्ता व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

देश/संस्था स्थिति या मांग
ब्रिटेन फीस का विरोध और फ्री नेविगेशन की मांग
ईरान 20 लाख डॉलर तक की फीस और भुगतान रियाल में
यूरोपीय संघ फीस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज किया
अमेरिका टोल का विरोध, लेकिन ईरानी पोर्ट्स की नाकाबंदी
UNCLOS ट्रांजिट के लिए पैसे लेने को अवैध माना