Yemen Crisis: ब्रिटेन ने हूती विद्रोहियों के हमलों पर जताई कड़ी चिंता, ईरान को दी चेतावनी

ब्रिटेन सरकार ने यमन में बढ़ रही हिंसा और हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में ब्रिटिश अधिकारियों ने साफ़ कहा कि हूती गुट आम नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद करे। इस बढ़ते तनाव की वजह से मध्य पूर्व और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ रहा है, जिससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है।
ब्रिटेन ने यूएन में उठाई आवाज़
13 अगस्त 2026 को हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस के दौरान, ब्रिटेन के प्रतिनिधियों ने हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे हिंसक हमलों की कड़ी निंदा की। ब्रिटेन सरकार ने आधिकारिक तौर पर ईरान को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि तेहरान को हूती विद्रोहियों को मिलने वाला समर्थन अब बंद करना चाहिए। ब्रिटिश सरकार के मुताबिक, ईरान का यह पुराना समर्थन क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहा है और यमन में चल रहे मानवीय संकट को और ज़्यादा गंभीर बना रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।
हिंसा और हमलों का बढ़ता दायरा
यमन के भीतर हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं और पिछले कुछ दिनों में झड़पें काफी तेज हो गई हैं। खासकर Hadramout और Marib प्रांतों में लगातार टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में हूती विद्रोहियों ने हदरामौत में एक सरकारी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन से हमला किया, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 15 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा, लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में 11 अगस्त को एक कमर्शियल जहाज पर हमला किया गया, जिसमें 6 बेकसूर लोगों की जान चली गई।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और संभावित सैन्य कदम
बढ़ते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए यमन की सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगा रही है। क्षेत्रीय शांति और लाल सागर के रास्तों को सुरक्षित रखने के लिए अब पड़ोसी देश भी गंभीर कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब लाल सागर के तटीय इलाकों को हूती नियंत्रण से वापस पाने के लिए एक बड़े जमीनी सैन्य अभियान यानी ग्राउंड कैंपेन की योजना पर विचार कर रहा है। इन घटनाओं से साफ है कि आने वाले दिनों में यमन का संघर्ष एक नया मोड़ ले सकता है, जिससे वहां रह रहे लोगों और खाड़ी के समुद्री रास्तों से जुड़े व्यापार पर गहरा असर पड़ेगा।