पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) में चल रहे तनाव, इंटरनेट ब्लैकआउट और गिरफ्तारी के मामलों पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाने लगी है। ब्रिटेन के 50 से अधिक सांसदों ने इस मुद्दे पर अपनी सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। कश्मीर पर ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के अध्यक्ष और ब्रैडफोर्ड ईस्ट के सांसद इमरान हुसैन के नेतृत्व में सांसदों ने ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर को पत्र भेजकर क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए राजनयिक चैनलों का उपयोग करने का आग्रह किया है।
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पीओजेके में क्यों हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारियां?
पीओजेके में पिछले कई हफ्तों से स्थानीय नागरिकों द्वारा बुनियादी अधिकारों, बिजली और आटे पर सब्सिडी जैसी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को वहां के प्रशासन ने 5 या 6 जून 2026 को प्रतिबंधित घोषित कर दिया। इसके बाद बड़े पैमाने पर लोगों की गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में कम से कम 11 लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इसी कारण क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट और संचार सेवाओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
ब्रिटिश सांसदों ने पत्र में क्या चिंताएं व्यक्त की हैं?
ब्रिटिश सांसदों द्वारा 6 जून 2026 को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि वे क्षेत्र में जारी लॉकडाउन, संचार ब्लैकआउट और लोगों की बड़े पैमाने पर हो रही गिरफ्तारियों से बेहद चिंतित हैं। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में कुछ ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं। सांसदों ने विदेश मंत्री से मांग की है कि ब्रिटेन सरकार अपने राजनयिक माध्यमों का उपयोग कर पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि क्षेत्र में संचार व्यवस्था बहाल हो सके और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए बातचीत के जरिए इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। इस बीच भारत ने भी हमेशा की तरह अपना रुख स्पष्ट रखा है कि यह पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।
प्रवासी कश्मीरी समुदाय ने क्यों जताई चिंता?
ब्रिटेन में रह रहे कश्मीरी मूल के लोगों ने अपने रिश्तेदारों से संपर्क न हो पाने के कारण चिंता व्यक्त की है। संचार व्यवस्था ठप होने से लोग अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। इसी सिलसिले में 8 जून 2026 को लीड्स में कश्मीरी प्रवासियों की एक बैठक हुई और यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने पाकिस्तानी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने का भी फैसला किया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के लिए कड़े कानून लागू कर रहा है जिससे आम जनता की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटेन सरकार को पत्र कब भेजा था?
ब्रिटिश सांसदों ने 6 जून 2026 को ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर को पत्र भेजकर पीओजेके में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और इंटरनेट ब्लैकआउट पर चिंता व्यक्त की थी।
पीओजेके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को क्यों प्रतिबंधित किया गया?
स्थानीय प्रशासन ने जून 2026 के पहले हफ्ते में इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया था क्योंकि यह संगठन आटे और बिजली पर सब्सिडी की मांगों को लेकर जारी बड़े विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहा था।
