वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को देश का आम बजट पेश किया। इस दौरान सरकार ने पिछले साल के खर्चों का जो ब्यौरा दिया, उसने सबको चौंका दिया है। सरकार ने पिछले साल यानी 2025-26 में कई बड़ी योजनाओं के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया था, लेकिन उसका एक बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया है। जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बड़ी स्कीमों का पैसा अभी भी सरकारी खातों से पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाया है।

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किन योजनाओं में कितना पैसा रह गया बिना खर्च?

बजट दस्तावेजों के मुताबिक, मोदी सरकार ने जिन योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये अलग रखे थे, उनमें से कई योजनाओं में आधे से ज्यादा पैसा बच गया है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने का लक्ष्य था, लेकिन इसमें आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हुआ। इसी तरह पीएम इंटर्नशिप स्कीम, जो युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए थी, उसका प्रदर्शन भी सुस्त रहा है।

यहां देखिए किस योजना में कितना पैसा मिला था और कितना खर्च हुआ:

योजना का नाम बजट (करोड़ में) असल खर्च (करोड़ में)
जल जीवन मिशन 67,000 17,000
पीएम इंटर्नशिप स्कीम 10,831 526
पीएम आवास (शहरी 2.0) 3,500 300
पीएम आवास (शहरी) 19,794 7,500
पीएम आवास (ग्रामीण) 57,832 32,500
भारतनेट 22,000 5,500

योजनाओं में देरी और नए बदलाव

इस कम खर्च के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। पीएम इंटर्नशिप स्कीम में वजीफा कम होने और छात्रों की कम रुचि के कारण पैसा कम खर्च हुआ। वहीं, कई राज्यों में योजनाओं को लागू करने में देरी हुई है, जिससे केंद्र का पैसा वहीं का वहीं रह गया। अर्बन चैलेंज फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन उसमें से सिर्फ 71 करोड़ रुपये ही खर्च होने का अनुमान है।

बजट 2026-27 में सरकार ने कुछ नए ऐलान भी किए हैं। मनरेगा (MGNREGA) की जगह अब एक नई योजना ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार’ (VB-G RAM G) लाने की बात कही गई है। इसके लिए सरकार ने नए साल में 95,692 करोड़ रुपये का बजट रखा है। सरकार की कोशिश है कि पुराने रुके हुए कामों को अब नए वित्तीय वर्ष में तेजी से पूरा किया जाए।