केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। सरकार ने ऐलान किया है कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) से मिलने वाले मुआवजे पर जो ब्याज मिलता है, उस पर अब कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। इसके साथ ही इस रकम पर TDS भी नहीं काटा जाएगा, जिससे पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
क्या है यह नया नियम और किसे मिलेगा फायदा?
वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा के मुताबिक, यह छूट ‘प्राकृतिक व्यक्तियों’ यानी आम लोगों के लिए है। अक्सर सड़क दुर्घटना के मामलों में कोर्ट या ट्रिब्यूनल द्वारा मुआवजा तय करने में समय लगता है, जिस कारण पीड़ित को ब्याज के साथ राशि दी जाती है। अब यह ब्याज पूरी तरह से टैक्स फ्री होगा। इसका सीधा फायदा दुर्घटना के शिकार लोगों और उनके परिवारों को मिलेगा, जिन्हें अब टैक्स रिफंड के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
पुराने नियम से कितना अलग है यह फैसला?
अभी तक के नियमों के अनुसार बीमा कंपनियों को ब्याज पर टैक्स काटना पड़ता था। यहाँ पुराने और नए नियम का अंतर समझिए:
- पुराना नियम: इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194A के तहत, अगर मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज 50,000 रुपये से ज्यादा होता था, तो बीमा कंपनियां 10% TDS काट लेती थीं। लोगों को यह पैसा वापस पाने के लिए बाद में ITR फाइल करना पड़ता था।
- नया नियम: अब ब्याज की राशि चाहे जितनी भी हो, उस पर न तो कोई इनकम टैक्स लगेगा और न ही बीमा कंपनियां उस पर TDS काटेंगी। पूरा पैसा पीड़ित के खाते में जाएगा।
कब से लागू होगा यह बदलाव?
बजट भाषण में दी गई जानकारी के अनुसार, यह नियम नए ‘इनकम टैक्स एक्ट’ के तहत 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। यह मुद्दा काफी समय से सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाई कोर्ट में भी चर्चा का विषय था कि मुआवजे के ब्याज को ‘आय’ माना जाए या नहीं। अब सरकार ने कानून में बदलाव करके इसे पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह मदद है, आय नहीं।
