कनाडा का अमेरिका पर बड़ा पलटवार, 700 उत्पादों पर 50% तक जवाबी टैरिफ लगाने का किया ऐलान

Sushma Kumari25 August 20262 min read74 viewsWorld
कनाडा का अमेरिका पर बड़ा पलटवार, 700 उत्पादों पर 50% तक जवाबी टैरिफ लगाने का किया ऐलान

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव अब काफी बढ़ गया है, जिसके चलते कनाडाई सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ओटावा से मिली जानकारी के अनुसार, कनाडा ने लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामानों पर भारी भरकम जवाबी टैरिफ लगाने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की 'डॉलर के बदले डॉलर' वाली नीति के तहत ये नए शुल्क आगामी 08 सितंबर से पूरी तरह लागू हो जाएंगे। इस फैसले से दोनों पड़ोसी देशों के बीच चल रहा व्यापार विवाद और अधिक गहराने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

किन उत्पादों पर लगेगा कितना शुल्क

कनाडाई सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, लगभग 700 अमेरिकी उत्पादों को इस नई टैरिफ सूची में शामिल किया गया है। इन तमाम वस्तुओं पर 15 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 50 प्रतिशत तक का आयात शुल्क वसूला जाएगा। इस आदेश का सबसे कड़ा और बड़ा असर अमेरिकी स्टील और एल्यूमिनियम पर पड़ने वाला है, क्योंकि इन दोनों धातुओं पर सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया गया है। इसके अलावा वीडियो गेम कंसोल पर भी सीधा 50 प्रतिशत का टैरिफ चुकाना होगा।

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खाने-पीने की चीजों और घरेलू सामानों को भी इस सूची से बाहर नहीं रखा गया है। पनीर, ताजी और जमी हुई मछली के अलावा विभिन्न समुद्री उत्पादों पर सरकार ने 25 प्रतिशत शुल्क तय किया है। लकड़ी से जुड़े कई निर्माण और सजावटी सामानों पर भी 25 प्रतिशत की दर से ही टैक्स लगेगा। इसके अतिरिक्त आम जनता के घरों में इस्तेमाल होने वाले घरेलू उपकरण जैसे वॉशिंग मशीन, हेयर ड्रायर और स्टोव भी इस नए दायरे में आएंगे। इन सभी घरेलू उपकरणों पर भी सरकार ने 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का कड़ा फैसला लिया है।

घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम

कनाडाई सरकार का साफ तौर पर कहना है कि इन जवाबी शुल्कों को लगाने का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर मौजूद घरेलू उद्योगों, स्थानीय कारोबारियों और मेहनतकश कामगारों के आर्थिक हितों की पूरी सुरक्षा करना है। अमेरिका की ओर से पहले लगाए गए नए शुल्कों के जवाब में यह कड़ा रुख अपनाया गया है। ओटावा में बैठे हुक्मरानों का मानना है कि इस नीति से स्थानीय बाजार को मजबूती मिलेगी और विदेशी दबाव का कड़ाई से मुकाबला किया जा सकेगा। आने वाले दिनों में इस व्यापारिक भिड़ंत का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है।

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