9 मार्च 2026 को कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से फोन पर बातचीत की। यह कॉल ईरान युद्ध के बीच हुई है जहां मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। दोनों नेताओं ने इस दौरान कतर पर हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री कार्नी ने इस मुश्किल समय में कतर के साथ कनाडा की पूरी एकजुटता व्यक्त की है।

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हमलों को रोकने और शांति पर जोर

दोनों देशों के नेताओं ने कूटनीतिक बातचीत को तेज करने पर जोर दिया ताकि इस युद्ध को एक बड़े वैश्विक संघर्ष में बदलने से रोका जा सके। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार दोनों ने नागरिकों और बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों को तुरंत बंद करने की मांग की। उनका साफ कहना है कि इस तरह के हमलों से न सिर्फ इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। खाड़ी देशों में रहने वाले आम प्रवासियों और वहां काम करने वाले लोगों के लिए भी इस तनाव के कारण चिंता की स्थिति बनी हुई है।

ईरान युद्ध का कारण और कनाडा की भूमिका

इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और उन खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए जहां अमेरिकी सैन्य बेस मौजूद हैं।

  • कनाडा को इस अमेरिकी-इजरायली हमले के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और न ही उसने इसमें हिस्सा लिया।
  • 4 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट किया था कि जरूरत पड़ने पर वह सैन्य भागीदारी से पीछे नहीं हटेंगे और अपने सहयोगियों का साथ देंगे।
  • जनवरी 2026 में कार्नी ने कतर का ऐतिहासिक दौरा किया था जहां दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी थी।