पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब भारत में मरीजों की जेब पर पड़ने वाला है. सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ जरूरी दवाओं और टिटनेस के इंजेक्शन की कीमतों में बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है. कच्चा माल न मिलने की वजह से कंपनियों के लिए ये दवाइयां बनाना अब घाटे का सौदा हो गया था.
क्यों बढ़ी दवाओं की कीमतें
पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से दवाओं को बनाने वाला कच्चा माल यानी API मिलना बहुत मुश्किल हो गया है. खासकर कैंसर की दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्लैटिनम की कीमत बहुत तेजी से बढ़ी है. जून 2025 में प्लैटिनम की कीमत करीब 2,000 रुपये प्रति ग्राम थी जो अब बढ़कर लगभग 5,000 रुपये हो गई है. इस वजह से कई कंपनियों ने इन दवाओं का उत्पादन कम कर दिया था.
इन दवाओं के दाम हुए ज्यादा
National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) ने कैंसर की दवाओं Cisplatin और Carboplatin के साथ-साथ Anti-Tetanus Immunoglobulin इंजेक्शन की अधिकतम कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. AIIMS दिल्ली और Tata Memorial Centre जैसे बड़े अस्पतालों में इन दवाओं की कमी देखी जा रही थी क्योंकि कंपनियां इन्हें बना नहीं पा रही थीं.
| दवा का नाम | पुरानी अधिकतम कीमत | नई अधिकतम कीमत |
|---|---|---|
| Carboplatin (10 mg/ml) | 60.49 रुपये प्रति ml | 90.74 रुपये प्रति ml |
| Cisplatin (1 mg/ml) | 7.26 रुपये प्रति ml | 10.89 रुपये प्रति ml |
| Anti-Tetanus Immunoglobulin | पुराना रेट | 50% की बढ़ोतरी |
सरकार का फैसला और नियम
यह फैसला Drugs (Prices Control) Order (DPCO) 2013 के पैरा 19 के तहत लिया गया है. NPPA ने 11 जून 2026 को इसकी मंजूरी दी. Department of Pharmaceuticals के सचिव मनोज जोशी ने बताया कि कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाना जरूरी था. सरकार का कहना है कि दवाओं की कीमत बढ़ाना मजबूरी है ताकि बाजार में दवाओं की उपलब्धता बनी रहे और मरीजों का इलाज न रुके. इन नई कीमतों की दोबारा समीक्षा 6 महीने बाद की जाएगी.
कौन सी कंपनियां बनाती हैं ये दवाइयां
भारत में Naprod Life Sciences, Cipla, Intas Pharmaceuticals और Venus Remedies जैसी कंपनियां ये कैंसर की दवाइयां बनाती हैं. वहीं Anti-Tetanus Immunoglobulin के लिए M/s Bharat Serums and Vaccines Ltd देश की इकलौती निर्माता कंपनी है.
