Caspian Sea Convention: ईरान ने कैस्पियन सागर समझौते को संसद में भेजा, सुरक्षा और हितों को बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम।

Aanya10 August 20263 min read68 viewsWorld
Caspian Sea Convention: ईरान ने कैस्पियन सागर समझौते को संसद में भेजा, सुरक्षा और हितों को बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम।

तेहरान में 10 अगस्त 2026 को कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति पर बने कन्वेंशन को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। ईरान सरकार ने इस अहम समझौते के बिल को अपनी संसद में मंजूरी के लिए बहुत जल्दी में भेज दिया है। IRNA News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के कैस्पियन सागर सचिवालय के प्रमुख नबीुल्लाह अजामी ने बताया कि यह समझौता देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने का काम करता है। इस संधि को सबसे पहले अगस्त 2018 में कजाकिस्तान के Aktau शहर में पांचों तटीय देशों यानी ईरान, रूस, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान द्वारा साइन किया गया था। इस बारे में अधिक जानकारी आप Uniindia News पर देख सकते हैं।

कैस्पियन सागर संधि के मुख्य नियम और सुरक्षा के इंतजाम

अजामी ने साफ किया कि इस कन्वेंशन की वजह से कैस्पियन सागर के इलाके में किसी भी ऐसे देश की सेना, युद्धपोत या मिलिट्री बेस आने की अनुमति नहीं होगी जो इस सागर के किनारे पर नहीं बसे हैं। इसके अलावा सभी देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी दूसरे देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने देंगे। इस समझौते ने कैस्पियन सागर को एक अलग ही कानूनी दर्जा दिया है, जिसे पारंपरिक समुद्रों या झीलों की श्रेणी में नहीं रखा जाता है और यह 1982 UN Convention on the Law of the Sea के नियमों से अलग है। अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते से किसी भी देश के समुद्री तल यानी seabed और जमीन के नीचे के संसाधनों का हिस्सा तय नहीं होता है, बल्कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए आने वाले समय में आपसी समझौतों पर काम किया जाएगा।

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मछली पकड़ने का दायरा बढ़ा और पर्यावरण की सुरक्षा

इस नए समझौते के तहत मछली पकड़ने का अधिकार क्षेत्र 10 नॉटिकल मील से बढ़ाकर 25 नॉटिकल मील कर दिया गया है। इसके साथ ही नेविगेशन, मछली पालन, पर्यावरण की सुरक्षा, वैज्ञानिक शोध और आतंकवाद तथा ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए मिलकर काम करने के प्रावधान भी जोड़े गए हैं। समुद्री तल पर बिछाई जाने वाली पाइपलाइनों के लिए भी कड़े पर्यावरणीय नियम तय किए गए हैं, जिससे ईरान को इन मामलों में बहुत बड़ी भूमिका मिलती है। ईरान के उप-विदेशी मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने भी इस बात को दोहराया है कि इस संधि के पास होने से समुद्र के नीचे के संसाधनों के बंटवारे पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ईरान का अपने समुद्री क्षेत्र पर पूरा अधिकार बना रहेगा।

संसद में बिल पेश करने की असली वजह

9 अगस्त 2026 तक की स्थिति के अनुसार, ईरान अब इस संधि को मंजूरी देने वाला एकमात्र कैस्पियन तटीय देश बचा है, जिसने इसे अभी तक पास नहीं किया था। सरकार द्वारा इस प्रक्रिया को तेज करने के पीछे कई बड़े कारण हैं, जैसे कि बदलता हुआ सुरक्षा माहौल, अमेरिका के साथ बढ़ती तनातनी और एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हुआ कथित हमला। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पहले ही 1 अगस्त को यह स्पष्ट कर दिया था कि इस दस्तावेज के पूरी तरह लागू होने से एक साफ कानूनी ढांचा तैयार होगा और बाहर के देशों को इसका फायदा उठाने से रोका जा सकेगा। इसके अलावा, ईरान आने वाले हफ्ते में कैस्पियन तटीय देशों की एक बड़ी बैठक की मेजबानी करने की योजना भी बना रहा है।

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