CBI का बड़ा एक्शन, डिजिटल अरेस्ट गैंग के 3 लोग गिरफ्तार, बैंक मैनेजर ने मदद की थी ठगी में

CBI ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में IndusInd Bank के एक असिस्टेंट मैनेजर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों ने मिलकर एक बुजुर्ग व्यक्ति को डराया और उनसे 1.6 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ठग ली।

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डिजिटल अरेस्ट घोटाला क्या है और कैसे हुई ठगी?

CBI ने साफ किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है और न ही ऐसा कोई कानून बना है। ठग लोग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताते हैं और फोन पर डराकर लोगों को यकीन दिलाते हैं कि उन्हें डिजिटल तरीके से गिरफ्तार किया जा रहा है। इसी डर का फायदा उठाकर आरोपियों ने एक वरिष्ठ नागरिक को अपना शिकार बनाया और उनसे भारी रकम वसूली।

कौन हुए गिरफ्तार और CBI ने क्या कार्रवाई की?

शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को CBI ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पांच अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान IndusInd Bank के असिस्टेंट मैनेजर Dubbaka Mahesh को पकड़ा गया। आरोप है कि उसने फर्जी कंपनी के नाम पर बैंक खाता खोलने में मदद की, जिसमें ठगी का पैसा जमा किया गया था। इसके अलावा Rajesh Kanna और Vayala Srinivas को भी गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी खातों (mule accounts) के जरिए पैसों को इधर-उधर घुमाने का काम करते थे।

CBI की चेतावनी और मामले की मुख्य जानकारी

CBI ने जनता को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान फोन कॉल से न डरें और ऐसी किसी भी धमकी को न मानें। अगर कोई सरकारी अधिकारी होने का दावा कर पैसा मांगे, तो तुरंत इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी पुलिस स्टेशन में करें। सुप्रीम कोर्ट ने इस खतरे को देखते हुए CBI को पूरे देश में इन घोटालों की जांच करने का अधिकार दिया है।

नाम/संस्था भूमिका/जानकारी
Dubbaka Mahesh IndusInd Bank असिस्टेंट मैनेजर, फर्जी खाता खोलने में मदद की
Rajesh Kanna म्यूल अकाउंट्स का मैनेजमेंट और पैसों का लेन-देन
Vayala Srinivas म्यूल अकाउंट्स का मैनेजमेंट और पैसों का लेन-देन
पीड़ित वरिष्ठ नागरिक, जिनसे 1.6 करोड़ रुपये ठगे गए
CBI जांच एजेंसी, जिसने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में छापेमारी की
सुप्रीम कोर्ट CBI को देशव्यापी जांच का अधिकार देने वाला न्यायालय