Strait of Hormuz में तनाव बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने बताया कि मई की शुरुआत से अब तक उन्होंने 800 से ज़्यादा कमर्शियल जहाजों और 380 मिलियन बैरल कच्चे तेल को सुरक्षित निकाला है। अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि इस रास्ते पर ईरान का कोई कंट्रोल नहीं है और यह एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है जहाँ कमर्शियल जहाजों के आने-जाने पर किसी एक देश का हक नहीं है।
अमेरिकी सेना के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि अमेरिकी सेना जहाजों को फिजिकली एस्कॉर्ट नहीं कर रही है, बल्कि उनके साथ लगातार संपर्क और तालमेल बनाए हुए है। यह सब उस समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज़ी से बढ़ा है।
दोनों देशों के बीच हुए सैन्य हमले
7 जुलाई को अमेरिका ने ईरान की 80 से ज़्यादा जगहों पर हमला किया। इनमें ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल ठिकाने शामिल थे। यह हमला ईरान द्वारा तीन कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमले का जवाब था। इसके बाद 9 जुलाई को अमेरिका ने फिर से करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया ताकि ईरान कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरा न बन सके।
ईरान ने भी चुप न रहकर 8 और 9 जुलाई को जवाबी हमला किया। ईरान के IRGC ने दावा किया कि उन्होंने Bahrain, Kuwait, Qatar और Jordan में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की 85 जगहों पर हमला किया और एक MQ-9 ड्रोन को भी मार गिराया।
रास्ते के कंट्रोल पर विवाद
अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के मुताबिक यह रास्ता सबके लिए खुला रहना चाहिए, लेकिन ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबफ ने कहा कि यह रास्ता उनकी शर्तों और अरेंजमेंट पर ही खुलेगा। खबर है कि ईरान ने अपना अलग ट्रैफिक सिस्टम बनाया है और जहाजों से फीस भी ले रहा है। इस पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने पर प्रतिबंध लग सकते हैं।
दोनों देशों के बीच युद्धविराम (ceasefire) के लिए बातचीत चल रही थी, लेकिन अब यह रुक गई है। अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने की छूट भी खत्म कर दी है। शिपिंग डेटा से पता चलता है कि अब ज़्यादातर जहाज ईरान के बताए उत्तरी रास्ते से जा रहे हैं और ओमान वाले रास्ते का इस्तेमाल अब बहुत कम हो रहा है।
