ईरान के समुद्री नाकेबंदी के बीच अमेरिका ने 51 जहाजों को बदला रास्ता, तनाव के बीच खाड़ी देशों की सुरक्षा पर बड़ा अपडेट

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच U.S. Central Command (CENTCOM) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कुल 51 कमर्शियल जहाजों के रूट में बदलाव किया है। यह कार्रवाई 7 अगस्त 2026 को सामने आई है, जो ईरान द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में की जा रही है। पिछले एक दिन के भीतर ही इन जहाजों को सुरक्षित स्थानों की ओर मोड़ा गया है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के हमले या नुकसान से बचाया जा सके। यह पूरा ऑपरेशन 14 जुलाई 2026 से जारी है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले मालवाहक जहाजों को रोकना है।
समुद्री सुरक्षा और अमेरिकी कार्रवाई
क्षेत्र में स्थिति इतनी गंभीर है कि CENTCOM ने केवल जहाजों को रास्ता बदलने का निर्देश ही नहीं दिया, बल्कि दो जहाजों को पूरी तरह से डिसेबल कर दिया और दो अन्य जहाजों पर बोर्डिंग की कार्रवाई भी की है। इस पूरी समुद्री निगरानी में U.S. Marine Corps की एविएशन टीम, USS Boxer (LHD 4), और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Mason (DDG 87) तथा USS Michael Murphy (DDG 112) तैनात हैं। ये सभी युद्धपोत ओमान की खाड़ी और उसके आसपास के महत्वपूर्ण रास्तों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
ईरान और ओमान का समझौता प्रस्ताव
दूसरी तरफ, ईरान की सरकारी मीडिया ने एक बड़े समझौते की जानकारी साझा की है जो ओमान के साथ किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के तहत Strait of Hormuz से अमेरिकी और इजरायली जहाजों के गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। यदि कोई जहाज इस नियम को तोड़ता है, तो ईरान उस पर कार्गो वैल्यू का 20% तक जुर्माना लगाने की योजना बना रहा है। इतना ही नहीं, ईरान उन सभी देशों के जहाजों को भी प्रतिबंधित करने की धमकी दे रहा है जो उन्हें नुकसान पहुँचा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि वह समुद्र में आवाजाही की आजादी सुनिश्चित करने के अपने रुख पर कायम रहेगा।
क्षेत्रीय सुरक्षा में नया मोड़
क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Saudi Arabia, Turkey और Pakistan ने मक्का में एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सामूहिक रक्षा समझौता ईरान द्वारा खाड़ी देशों के तेल निर्यातकों पर किए गए लगातार हमलों के जवाब में तैयार किया गया है। यह सुरक्षा गठबंधन दर्शाता है कि मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक ढांचा तेजी से बदल रहा है। इस स्थिति का सीधा असर उन हजारों प्रवासियों पर भी पड़ता है जो इन खाड़ी देशों में काम करते हैं, क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार में बाधा आने से महंगाई और रोजगार की स्थिरता पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। फिलहाल, इस पूरे इलाके में तनाव चरम पर है और दुनिया भर की निगाहें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर टिकी हुई हैं।