केंद्र सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़े सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लंबे समय से अटके पड़े बिजली संशोधन विधेयक (Electricity Amendment Bill) पर आम सहमति बनाने और आगे की रणनीति तय करने के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने ‘चिंतन शिविर’ आयोजित करने का फैसला किया है। इस विशेष बैठक में राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी ताकि पुराने गतिरोध को खत्म कर विकास की रफ़्तार बढ़ाई जा सके।

चार बार संसद में पेश होने के बावजूद राज्यों और बिजली कर्मचारियों के विरोध के कारण अब तक कानून नहीं बन पाया है यह विधेयक

बिजली क्षेत्र में सुधार की कोशिशें पिछले एक दशक से जारी हैं। वर्ष 2014 से लेकर अब तक बिजली संशोधन विधेयक को चार बार संसद के पटल पर रखा जा चुका है। प्रक्रिया के तहत इसे दो बार संसदीय समिति के पास भेजा गया और तीन बार इसके मसौदे को संशोधित भी किया गया। इन तमाम कोशिशों के बावजूद, अलग-अलग राज्यों और बिजली कर्मचारियों के कड़े विरोध के चलते इसे अब तक पारित नहीं कराया जा सका है। इसी को देखते हुए सरकार ने अब एकतरफा फैसला लेने के बजाय संवाद और सहमति का रास्ता चुना है।

इस महीने की 22 और 23 तारीख को जुटेंगे राज्यों के ऊर्जा मंत्री और विशेषज्ञ, सुधारों के लिए तैयार की जाएगी नई रूपरेखा

गतिरोध तोड़ने के लिए आयोजित किया जा रहा यह ‘चिंतन शिविर’ इस महीने की 22 और 23 तारीख को होगा। इस महामंथन में विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा देश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और बिजली क्षेत्र में आवश्यक सुधारों पर चर्चा करना है। मंत्रालय का प्रयास है कि राज्यों की चिंताओं को गंभीरता से समझा जाए और केंद्र-राज्य के बीच बेहतर तालमेल बनाकर विधेयक को एक व्यावहारिक और संतुलित रूप दिया जाए।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने और वितरण कंपनियों की हालत सुधारने के लिए कड़े बदलाव हैं जरूरी

ऊर्जा मंत्रालय इन सुधारों को महज एक विधेयक नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की एक अनिवार्य शर्त मान रहा है। सरकार का मानना है कि औद्योगिक विकास, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के लिए बिजली व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है। सरकार की मंशा बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, वितरण कंपनियों (DISCOMs) की माली हालत सुधारने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा व विकल्प प्रदान करने की है। इसी उद्देश्य के साथ राज्यों से राय लेकर अब एक नया रोडमैप तैयार किया जाएगा।

GulfHindi Desk

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