अमेरिका के नए प्रतिबंधों के बाद चीन ने किया ईरान का समर्थन, गल्फ देशों में बढ़ी हलचल

अमेरिका द्वारा ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बाद चीन ने खुलकर ईरान का साथ देने की बात कही है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हाल ही में ईरान के कई सेक्टरों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर ईरान के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते जारी रखेगा। इस बड़े घटनाक्रम का असर अब खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका का नया आर्थिक अभियान और प्रतिबंध
अमेेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent के नेतृत्व में 24 अगस्त 2026 को Operation Economic Outcast नाम से एक नया अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था के पांच मुख्य सेक्टरों को निशाना बनाया गया है, जिसमें डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग शामिल हैं। इस कार्रवाई के दायरे में लगभग 60 संस्थाएं, व्यक्ति और जहाज आए हैं जिन पर ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में मदद करने का आरोप है। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान को रेमिटेंस भेजने के लाइसेंस भी रद्द कर दिए हैं और एक नौसैनिक नाकाबंदी भी शुरू कर दी है। इस नाकाबंदी की वजह से कई कमर्शियल जहाजों को रोका गया है और रास्ते बदले गए हैं।
चीन का रुख और व्यापारिक रिश्ते
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने 24 और 25 अगस्त को साफ शब्दों में कहा कि उनका देश किसी भी तरह के एकतरफा और अवैध प्रतिबंधों के खिलाफ है जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी नहीं मिली है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और वह अपने हितों की रक्षा करना अच्छी तरह जानता है। चीन ने ईरान से तेल खरीदने के लिए निजी रिफाइनरियों का नेटवर्क बना रखा है और पेमेंट युआन में होती है ताकि पश्चिमी देशों की वित्तीय प्रणाली से बचा जा सके। हालांकि अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा, उसे डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय प्रभाव
अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरान के अधिकारियों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh ने 25 अगस्त को बताया कि उनका देश ऐसी हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भरोसा जताया कि चीन और रूस उनका साथ नहीं छोड़ेंगे। वहीं दूसरी तरफ ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने धमकी दी है कि जो भी देश अमेरिका का साथ देगा उसे ईरान का दुश्मन माना जाएगा और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को तेल निर्यात के लिए बंद किया जा सकता है। अमेरिका के इस दबाव के बीच यूएई ने ईरानी व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।