चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने 27 मार्च 2026 को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए शांति वार्ता शुरू करना आसान काम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Strait of Hormuz में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। इस युद्ध के कारण दुनिया के व्यापारिक मार्ग पर गहरा असर पड़ा है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

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Strait of Hormuz में अभी क्या हालात हैं?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आना-जाना अब पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में हो गया है। यहाँ से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहाँ रोजाना औसतन 153 जहाज यहाँ से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल 13 रह गई है। इसके अलावा कई देशों के जहाजों को रोक कर रखा गया है।

  • लगभग 120 से ज्यादा कंटेनर जहाजों को अलग-अलग जगहों पर रोक दिया गया है।
  • 27 मार्च को ईरान की IRGC Navy ने तीन चीनी कंटेनर जहाजों को भी रास्ता देने से मना कर दिया और उन्हें वापस भेज दिया।
  • भारतीय नाविकों ने जानकारी दी है कि क्षेत्र में GPS काम नहीं कर रहा है और पानी के नीचे बारूदी सुरंगों का खतरा बना हुआ है।
  • जहाजों को अब व्यापारिक रास्तों के बजाय ईरान के कंट्रोल वाले रास्तों से अंधेरे में निकाला जा रहा है।
  • ओमान अब इस क्षेत्र में माल की ढुलाई और जहाजों के लिए नया रसद केंद्र बन गया है।

शांति वार्ता और मध्यस्थता को लेकर क्या है ताजा अपडेट?

चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने सभी देशों से अपील की है कि वे बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता चुनें। उन्होंने अमेरिका और ईरान को फिर से मेज पर आने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को 6 अप्रैल तक के लिए टालने का फैसला किया है।

देश शांति प्रयासों में भूमिका
China शांति वार्ता और बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन कर रहा है।
Pakistan वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेश पहुँचाने का मुख्य काम कर रहा है।
Iran शांति के लिए हर्जाना और हॉर्मुज पर अपनी संप्रभुता की मांग कर रहा है।
Turkey/Egypt मध्यस्थता के प्रयासों में मदद कर रहे हैं।

इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव

शांति की कोशिशों के बीच भी जमीनी हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। 27 मार्च 2026 की सुबह इज़राइल की सेना ने तेहरान में कई बुनियादी ढांचों पर बड़े हमले किए। यह युद्ध फरवरी में तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने भी इज़राइल और उन अरब देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है जहाँ विदेशी सेनाएं मौजूद हैं। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि इससे क्षेत्र की सुरक्षा और तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है।