China Middle East Strategy: मिडिल ईस्ट में चीन का बड़ा खेल, अमेरिका और ईरान के साथ बनाए रिश्ते ताकि न रुके तेल की सप्लाई

चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, इसलिए वह नहीं चाहता कि मिडिल ईस्ट में जंग और बढ़े. अब बीजिंग ने अमेरिका, ईरान, इसराइल और खाड़ी देशों के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को बहुत संभलकर चलाना शुरू कर दिया है. चीन का मकसद है कि युद्ध खत्म होने के बाद वह इस इलाके में एक शांतिदूत के रूप में सामने आए और उसका व्यापार सुरक्षित रहे.

चीन ने शांति के लिए क्या बड़े कदम उठाए हैं?

  • UAE के साथ बातचीत: 18 अप्रैल 2026 को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस को चार पॉइंट वाला एक प्रस्ताव दिया. इसमें युद्ध रोकने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की बात कही गई.
  • ईरान का समर्थन: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 3 मार्च 2026 को साफ किया कि बीजिंग ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता का समर्थन करता है.
  • सऊदी अरब के लिए प्लान: वांग यी ने सऊदी विदेश मंत्री को एक पांच पॉइंट वाला शांति प्लान बताया. इसमें उन्होंने खाड़ी देशों की सुरक्षा और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया.
  • अमेरिका को चेतावनी: 21 अप्रैल 2026 को चीन ने अमेरिका द्वारा ईरान के एक जहाज को पकड़े जाने पर अपनी चिंता जताई और शांति वार्ता शुरू करने को कहा.

चीन आखिर ऐसा क्यों कर रहा है?

जानकारों का कहना है कि चीन का यह तरीका पूरी तरह से व्यापार और फायदे पर टिका है. चीन किसी एक देश का साथ देने के बजाय सबके साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहता है ताकि उसे तेल की सप्लाई में कोई दिक्कत न आए. वह खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश कर रहा है जो दुनिया में शांति चाहता है.

22 अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया चीन के इस अलग अंदाज को देख रही है, जो अमेरिका के तरीके से बिल्कुल अलग है. चीन का मुख्य लक्ष्य यह है कि वह मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत करे और आर्थिक जोखिमों से बचा रहे. इसी बीच अमेरिका ने इराक के तेल डॉलर पर रोक लगा दी है, जिससे इस पूरे इलाके की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है.