चीन ने अमेरिका के खिलाफ खोला मोर्चा, ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को मानने से किया साफ इंकार

गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को चीनी सरकार ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ बड़ा बयान दिया। बीजिंग में आयोजित एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के प्रतिबंध लगाने और दबाव बनाने से कभी भी पुरानी समस्याएं हल नहीं होती हैं। उन्होंने सभी संबंधित देशों से अपील की कि वे जिम्मेदारी से काम लें और आपसी मामलों को बातचीत व कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने की कोशिश करें।
चीन की तरफ से यह आधिकारिक प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस ऐलान के बाद आई है, जो उन्होंने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस नए अभियान को 'इकोनॉमिक डी-डे' नाम दिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक हमला है, जिसका मुख्य मकसद ईरान को दुनिया भर से अलग-थलग करना है। इस नए आदेश के तहत अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी देश या प्राइवेट कंपनियां तेहरान को वित्तीय, व्यापारिक या किसी भी प्रकार की सहायता देंगी, उन्हें बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अमेरिका ने साफ किया कि जो भी बैंक, कारोबार, एयरपोर्ट या सरकारी विभाग ईरान की मदद करेंगे, उन पर कड़े एक्शन लिए जाएंगे।
चीन और ईरान के बीच तेल व्यापार का मामला
चीन हमेशा से ही अमेरिका के इन एकतरफा फैसलों का विरोध करता आया है। चीन ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। बीजिंग का यह मानना है कि अमेरिका की इस तरह की नीतियां क्षेत्रीय शांति के लिए ठीक नहीं हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति को नुकसान पहुंचता है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना जाना चाहिए ताकि दुनिया भर में शांति बनी रहे और कारोबार प्रभावित न हो।