चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बीजिंग में एक अहम मुलाकात हुई. इस बैठक में शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में चल रही हिंसा को तुरंत रोकने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब युद्ध और शांति के बीच एक बहुत ही नाजुक मोड़ पर खड़ा है और अब सभी तरह की लड़ाई बंद होनी चाहिए.

मिडिल ईस्ट में शांति के लिए क्या कहा चीन ने?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन को बताया कि मिडिल ईस्ट में और अधिक युद्ध करना सही नहीं होगा. उन्होंने एक ‘कॉम्प्रिहेंसिव सीजफायर’ यानी पूरी तरह से युद्धविराम की मांग की है. शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए शी जिनपिंग ने चार खास प्रस्ताव रखे हैं. इनका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति बनाना, तनाव को कम करना और लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना है.

रूस और चीन के बीच किन बातों पर हुई चर्चा?

दोनों नेताओं ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर बात की ताकि दोनों देशों का विकास हो सके. बैठक में ‘पावर ऑफ साइबेरिया 2’ गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई. रूस चाहता है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच वह चीन को गैस की सप्लाई बढ़ा सके. इसके अलावा BRICS और शंघाई सहयोग संगठन जैसे समूहों में मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी.

ईरान का संकट और ग्लोबल असर

बैठक में ईरान में चल रहे संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने जैसे मुद्दों पर भी बात हुई. इन हालातों की वजह से चीन अब रूस से ऊर्जा लेने पर ज्यादा निर्भर हो गया है. यह मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के बाद हुई है, जिसके बाद पुतिन और शी जिनपिंग ने अपनी रणनीतियों को आपस में तालमेल में लाया है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट के लिए क्या प्रस्ताव दिए?

शी जिनपिंग ने शांति और स्थिरता के लिए चार मुख्य प्रस्ताव रखे हैं. इनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना, क्षेत्र में तनाव को कम करना और युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना है।

रूस और चीन की इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य क्या था?

इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट में युद्ध रोकना और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग बढ़ाना था. इसमें ऊर्जा आपूर्ति के लिए गैस पाइपलाइन और वैश्विक शासन व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।