अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, चीन ने बातचीत की अपील की तो ईरान ने दी कड़ी चेतावनी.

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और हालात काफी गंभीर हो गए हैं। इस मामले में चीन ने आगे आकर दोनों देशों से शांति बनाए रखने और बातचीत करने की बात कही है। चीन का कहना है कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई और पाबंदियों से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता है। दुनिया भर में इस बात की चर्चा हो रही है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच का यह विवाद क्या नया मोड़ लेगा।
चीन ने क्या कहा और अमेरिका की क्या है तैयारी
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को यह साफ कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना किसी भी देश पर एकतरफा पाबंदियां नहीं लगानी चाहिए। चीन ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे गुस्से वाले कदम उठाने के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक रास्तों को चुनें। लेकिन दूसरी तरफ, अमेरिका अपनी बात पर अड़ा हुआ है। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि अमेरिका इतिहास की सबसे कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगाने की तैयारी कर रहा है। इन नए नियमों की पूरी जानकारी सोमवार, 24 अगस्त 2026 को सबके सामने लाई जाएगी।
अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि आर्थिक दबाव बनाना ही इस प्रशासन का सबसे असरदार हथियार है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 19 अगस्त 2026 को आने वाले इन कदमों को 'आर्थिक डी-डे' बताया था और कहा था कि इससे बहुत बड़े पैमाने पर आर्थिक घेराबंदी की जाएगी। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को हिजबुल्लाह संगठन पर नए प्रतिबंध भी लगा दिए हैं, क्योंकि उन पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स कुड्स फोर्स के लिए काम करने का आरोप है।
ईरान का कड़ा रुख और क्षेत्रीय प्रभाव
अमेरिका की इस सख्ती के जवाब में ईरान के अधिकारियों ने भी बहुत कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि अगर कोई नया खतरा पैदा हुआ तो उनका देश बहुत कड़ा और भयानक जवाब देगा। वहीं, विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका के इस कदम को 'आर्थिक आतंकवाद' करार दिया है। संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Ghalibaf ने 20 अगस्त को कहा था कि अमेरिका का आर्थिक युद्ध इस बात का सबूत है कि वे सीधी सैन्य लड़ाई में हार चुके हैं।
इन सब मुश्किलों के बीच ईरान खुद को बचाने के लिए ओमान के साथ एक खास व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे रहा है और इराक के साथ भी अपने व्यापार को बढ़ा रहा है ताकि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो सके। उधर, रिपोर्ट बताती हैं कि सितंबर और अक्टूबर के लिए ईरान के तेल के दामों में गिरावट आई है क्योंकि कीमतें बढ़ रही हैं और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी की वजह से ईरान के जहाजों को निकलने में परेशानी आ रही है।