अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और युद्ध को खत्म करने के लिए अब चीन ने अपनी आवाज़ बुलंद की है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते (MOU) को सही तरीके से लागू करना इस वक्त सबसे ज़रूरी है ताकि दुनिया में शांति बहाल हो सके।
Wang Yi ने यह बात बीजिंग में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ एक मुलाकात के दौरान कही। उन्होंने कहा कि अभी जो युद्धविराम (ceasefire) चल रहा है वह काफी नाजुक है, लेकिन लड़ाई और टकराव के बजाय बातचीत के रास्ते से मसलों को सुलझाना ज्यादा बेहतर है।
क्या है यह समझौता और इसकी शर्तें
अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच दुश्मनी को हमेशा के लिए खत्म करना है। इस MOU में कुछ मुख्य बातें शामिल हैं:
- सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकना।
- अमेरिका द्वारा ईरान की समुद्री नाकेबंदी को खत्म करना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करना।
- एक अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की बातचीत की समय सीमा तय करना।
अब तक क्या हुआ
इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई थी, जिसकी वजह से 8 अप्रैल 2026 को पहली बार दो हफ्ते के लिए युद्धविराम हुआ था। बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया। इसके बाद 12 जून 2026 को फिर से 60 दिनों के युद्धविराम की शर्तें तय हुईं, जिसके बाद 17 जून को MOU साइन हुआ।
शांति की दिशा में एक और कदम उठाते हुए, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के OFAC ने 22 जून 2026 को ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है।
चीन की अन्य कोशिशें
विदेश मंत्री Wang Yi केवल सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि अन्य देशों से भी संपर्क में हैं। उन्होंने 24 जून 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बात की और कहा कि यह समझौता ईरान के लंबे समय के हितों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उम्मीदों के मुताबिक है। इससे पहले 22 जून को नई दिल्ली में उन्होंने ईरान के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी कादिर निजामिपुर से भी मुलाकात की थी और बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने की बात कही थी।
