अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब कम होती दिख रही है। चीन ने दोनों देशों से अपील की है कि वे शांति की इस बातचीत को जारी रखें और इसे बीच में न छोड़ें। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई है, जिसकी बीजिंग ने खुलकर तारीफ की है।

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स्विट्जरलैंड के लेक लुसर्न में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf के बीच हाई-लेवल बातचीत हुई। इस बैठक के बाद पाकिस्तान और कतर ने एक साझा बयान जारी कर बताया कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है और माहौल सकारात्मक रहा। दोनों देशों ने आगे की तकनीकी बातचीत के लिए एक सिस्टम बनाने पर भी सहमति जताई है।

इस बातचीत के दौरान कुछ बड़े फैसले लिए गए हैं जिससे दुनिया भर में शांति बढ़ सकती है:

  • समुद्री सुरक्षा: ईरान और अमेरिका ने Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक सीधा संपर्क लाइन (communication line) शुरू करने का फैसला किया है।
  • लेबनान युद्ध: लेबनान में लड़ाई को रोकने और तनाव कम करने पर सहमति बनी है। इसके लिए वॉशिंगटन और इस्लामाबाद मिलकर एक ‘डीकॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाएंगे जो सैन्य गतिविधियों पर नजर रखेगा।
  • ईरान को राहत: ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि इस समझौते से ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटेंगी और उनके फ्रीज किए गए एसेट्स भी वापस मिलेंगे।

चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने 16 जून को साफ कहा था कि अब पीछे मुड़ने का समय नहीं है और किसी भी हाल में ताकत का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun और Lin Jian ने भी इस अंतरिम समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान को एक-दूसरे की बात माननी चाहिए ताकि दुनिया में स्थिरता आए।

बता दें कि यह पूरी बातचीत 17 जून 2026 को साइन हुए इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के दायरे में हो रही है। आने वाले समय में परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और विवादों को सुलझाने के लिए अलग-अलग वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे, जिनकी निगरानी एक हाई-लेवल कमेटी करेगी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.