चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बीच बीजिंग में एक बड़ी बैठक हुई। दोनों नेताओं ने अपने रिश्तों को सुधारने और उन्हें स्थिर बनाने का वादा किया। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान ताइवान और ईरान जैसे गंभीर मुद्दों पर दोनों देशों के बीच खींचतान भी देखने को मिली।
दोस्ती और बिजनेस पर क्या हुई बात?
दोनों नेताओं ने अगले तीन साल तक रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए एक नया विजन तैयार किया है। राष्ट्रपति Xi ने कहा कि चीन और अमेरिका को एक-दूसरे का साथी बनना चाहिए, न कि दुश्मन। व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, इस मीटिंग में इन बातों पर जोर दिया गया:
- आर्थिक सहयोग को बढ़ाना और अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन में बाजार के रास्ते खोलना।
- चीन द्वारा अमेरिकी खेती के सामानों की खरीद को बढ़ाना।
- अमेरिका में जा रहे ड्रग्स (fentanyl precursors) को रोकने के उपाय करना।
इस खास दौरे में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ Elon Musk (Tesla), Jensen Huang (Nvidia) और Tim Cook (Apple) जैसे बड़े कारोबारी भी शामिल थे।
ताइवान और ईरान को लेकर क्या हुआ विवाद?
ताइवान के मुद्दे पर राष्ट्रपति Xi Jinping काफी सख्त नजर आए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ताइवान का मामला चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे जरूरी मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे गलत तरीके से संभाला गया, तो दोनों देशों के बीच टकराव हो सकता है। वहीं ताइवान के विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया कि क्षेत्रीय शांति के लिए चीन ही सबसे बड़ा खतरा है।
ईरान के मामले में राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि राष्ट्रपति Xi ने ईरान को सैन्य उपकरण न भेजने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों नेताओं ने माना कि दुनिया में तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए Strait of Hormuz को खुला रखना बहुत जरूरी है। चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिका से और ज्यादा तेल खरीदने में भी दिलचस्पी दिखाई है।
इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio भी शामिल थे। खबरों के मुताबिक, चीन ने उनके नाम की स्पेलिंग में थोड़ा बदलाव किया ताकि उन्हें देश में आने की अनुमति मिल सके, क्योंकि उन पर पहले चीनी प्रतिबंध लगे हुए थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बीजिंग समिट में चीन और अमेरिका के बीच किन मुख्य बातों पर सहमति बनी
दोनों देशों ने अगले तीन साल तक रिश्तों को स्थिर रखने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही ईरान को सैन्य सामान न भेजने और Strait of Hormuz को खुला रखने पर भी बात हुई।
ताइवान मुद्दे पर चीन का क्या कहना था
राष्ट्रपति Xi Jinping ने कहा कि ताइवान का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है और ताइवान की आजादी और शांति एक साथ नहीं चल सकते, इसे नजरअंदाज करने से टकराव हो सकता है।
