अमेरिका के प्रतिबंधों पर चीन का कड़ा रुख, ईरान के समर्थन में कही बड़ी बात

चीन ने अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों के बाद अपने अधिकारों और हितों की पूरी तरह रक्षा करने का ऐलान किया है। बीजिंग का यह कड़ा रुख अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent द्वारा सोमवार, 24 अगस्त 2026 को उठाए गए कदमों के बाद सामने आया है। अमेरिका ने इस अभियान को ईरानी सरकार के खिलाफ 'आर्थिक घुटन' और 'आर्थिक डी-डे' का नाम दिया है, जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई है।
चीन ने की प्रतिबंधों की कड़ी निंदा
मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने एक औपचारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि चीन उन अवैध एकतरफा प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करता है जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी नहीं मिली है। Lin Jian ने जोर देकर कहा कि चीन और ईरान के बीच द्विपक्षीय सहयोग पूरी तरह से कानूनी ढांचे के भीतर होता है और इस तरह के संबंधों में बाहरी दखलंदाजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की आर्थिक जंग और दबाव की नीतियां केवल क्षेत्रीय तनाव को और ज्यादा बढ़ाने का काम करेंगी।
अमेरिका की नई रणनीति और निशाने पर कौन
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट और राष्ट्रपति Donald Trump की देखरेख में चलाई जा रही इस रणनीति का मुख्य मकसद ईरानी शासन को मिलने वाली सभी आर्थिक मदद को पूरी तरह रोकना है। वित्त मंत्री Scott Bessent ने साफ किया कि इस कदम का उद्देश्य तेहरान को अलग-थलग करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति या कंपनी मनी लॉन्ड्रिंग या प्रतिबंधों से बचने में मदद करेगी, उसे अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। इन नए उपायों के तहत पांच मुख्य ईरानी क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है जिनमें डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग शामिल हैं। ट्रेजरी विभाग ने दुनिया भर के लगभग 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें मुख्य भूमि चीन, हांगकांग, यूएई, सिंगापुर और फ्रांस की एक कुकिंग-तेल रिफाइनरी भी शामिल है। हालांकि चीनी कंपनियों को इसमें शामिल किया गया था, लेकिन शुरुआती प्रतिबंधों में चीन के बड़े वित्तीय संस्थानों को फिलहाल अलग रखा गया है।
ईरान का जवाब और क्षेत्रीय हालात
दूसरी तरफ ईरान के नेतृत्व ने इस कदम का डटकर मुकाबला करने की कसम खाई है। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh ने बताया कि देश इन प्रतिबंधों से निपटने के लिए दो साल की खास योजना के साथ पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो चीन और न ही रूस ने अमेरिकी आदेशों को माना है। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Hossein Mohebbi ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो अमेरिका के महत्वपूर्ण हितों और ऊर्जा मार्गों पर पलटवार किया जा सकता है। इन सब के बीच चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीददार बना हुआ है और वर्तमान में ईरान के कुल निर्यात का 80% से 90% हिस्सा अकेले चीन खरीदता है। वहीं पाकिस्तान ने तनाव को कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए मध्यस्थता के प्रयासों में प्रगति की जानकारी दी है।