अमेरिका पर भड़का चीन, रूस पर नया बिल आया तो उठाए जाएंगे कड़े कदम

Sushma Kumari12 August 20262 min read59 viewsWorld
अमेरिका पर भड़का चीन, रूस पर नया बिल आया तो उठाए जाएंगे कड़े कदम

अमेरिका की तरफ से रूस पर प्रतिबंध लगाने के नए विधेयक को आगे बढ़ाने पर चीन ने कड़ी चेतावनी दी है। बीजिंग ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अपने वैध हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में स्थित चीनी दूतावास ने इस बात पर जोर दिया है कि चीन इस तरह के किसी भी प्रतिबंध का समर्थन नहीं करता है और इसका कड़ा विरोध करता है।

अमेरिका की नई चाल और चीन का सख्त रुख

वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने मंगलवार को रिया नोवोस्ती को एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि अगर अमेरिका मॉस्को के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़ा नया बिल लेकर आता है, तो चीन अपनी सुरक्षा और हितों के लिए चुप नहीं बैठेगा। इस नए संभावित बिल के तहत रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने पर भारी ड्यूटी यानी टैक्स लगाने की बात कही जा रही है। चीनी प्रवक्ता ने साफ किया कि ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और इन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भी मंजूरी नहीं मिली है।

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अपने व्यवसाय और नागरिकों के वैध अधिकारों और हितों की मजबूती से रक्षा करने के लिए चीन हर जरूरी और सख्त कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे इस तनाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और राजनीति में हलचल बढ़ गई है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।

सीनेट में पास हुआ प्रतिबंधों से जुड़ा नया ड्राफ्ट

पिछले हफ्ते, अमेरिकी सीनेट ने एक नया बिल भारी बहुमत से मंजूर किया है। इस ड्राफ्ट कानून को दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया था, जिन्हें रूस में आतंकवादी और चरमपंथी माना जाता है। इस बिल को अमेरिकी सीनेट में 86-11 वोटों से मंजूरी मिल गई है। प्रतिबंधों से जुड़े इस नए ड्राफ्ट कानून में रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर प्रस्तावित टैरिफ को 500 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत करने का प्रावधान रखा गया है।

इसके साथ ही, इस बिल में यह भी प्रस्ताव है कि रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर ड्यूटी की दर को सीधे 500 प्रतिशत तय किया जाए। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में केवल ऊर्जा और सामान ही नहीं, बल्कि रूस के बड़े वित्तीय संस्थानों को भी निशाने पर लिया गया है। दस्तावेज़ में रूसी सेंट्रल बैंक के अलावा स्बेरबैंक, वीटीबी और गैज़प्रोमबैंक के खिलाफ भी कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।

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