Middle East Crisis: चीन ने दी बड़ी चेतावनी, कहा मध्य पूर्व के हालात हुए नाजुक, जंग रोकने को बनाया पहली प्राथमिकता

दुनिया की बड़ी ताकत चीन ने मध्य पूर्व (Middle East) के हालातों पर चिंता जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह क्षेत्र अब एक बहुत ही संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। चीन का मानना है कि इस वक्त सबसे जरूरी काम जंग को दोबारा शुरू होने से रोकना और युद्धविराम (ceasefire) को बनाए रखना है। यह बयान तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के लिए युद्धविराम की समय सीमा बढ़ा दी है।

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चीन ने जंग रोकने के लिए क्या कहा

चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने साफ किया है कि वे नहीं चाहते कि यह लड़ाई और आगे फैले। उन्होंने सभी देशों से अपील की है कि वे हथियारों का इस्तेमाल बंद करें और बातचीत का रास्ता अपनाएं। चीन ने चेतावनी दी है कि आम लोगों और गैर-सैन्य ठिकानों पर हमला करना एक लाल रेखा की तरह है जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए। खासकर ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और भोजन की सुरक्षा से जुड़ी चीजों को नुकसान पहुँचाना गलत है।

सऊदी और अन्य देशों का क्या है कहना

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने राष्ट्रपति Xi Jinping से बात की और बताया कि इस लड़ाई का असर खाड़ी देशों की सुरक्षा और दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है। सऊदी अरब ने चीन के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। इसी तरह UAE के क्राउन प्रिंस ने भी चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। वहीं चीन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों का भी समर्थन किया है।

शांति के लिए चीन का 4 पॉइंट प्लान

चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने 14 अप्रैल 2026 को शांति के लिए चार मुख्य सुझाव दिए थे। इसमें उन्होंने देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सुरक्षा के नए ढांचे, देशों की संप्रभुता का सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मानने की बात कही है। चीन का कहना है कि केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस विवाद को सुलझाया जा सकता है और वह इस मामले में तटस्थ रहकर शांति को बढ़ावा दे रहा है।