हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बहुत बढ़ गया है। 4 मई को एक चीनी तेल टैंकर पर हमला हुआ जिसकी वजह से जहाज़ के ऊपरी हिस्से पर आग लग गई। इस हादसे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज़ हो गया है और समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है।

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चीन के तेल टैंकर पर हमला और चीन की प्रतिक्रिया क्या है?

चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक 4 मई 2026 को उनके एक तेल टैंकर पर हमला हुआ था। इस हमले से जहाज़ पर आग लग गई। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस मामले में कहा है कि मिडिल ईस्ट में हालात बहुत संवेदनशील हो चुके हैं। चीन ने सभी देशों से अपील की है कि वे सैन्य कार्रवाई रोकें ताकि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर न पड़े। चीन ने बातचीत के ज़रिए मसले को सुलझाने पर ज़ोर दिया है।

ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की मुख्य बातें क्या हैं?

  • ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने साफ़ कहा है कि बिना उनकी इजाज़त के कोई भी जहाज़ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से नहीं गुज़रेगा।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत अमेरिकी नौसेना अब तेल टैंकरों को सुरक्षा दे रही है।
  • 4 मई को अमेरिकी सेना ने ईरान की 6 तेज़ रफ़्तार नावों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन को तबाह कर दिया।
  • 6 मई को एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी तेल टैंकर के पतवार (Rudder) को नुकसान पहुँचाया।
  • ईरान ने 19 अप्रैल को इस समुद्री रास्ते को अस्थायी रूप से बंद करने का ऐलान किया था।

क्या अन्य देशों के जहाज़ों पर भी हमला हुआ?

पिछले कुछ हफ़्तों में इस इलाके में कई हादसे हुए हैं। 4 मई को UAE के एक टैंकर पर ईरान के दो ड्रोन से हमला हुआ लेकिन कोई घायल नहीं हुआ। वहीं 31 मार्च को कुवैत के एक तेल टैंकर में आग लग गई थी। अप्रैल के महीने में चीन का एक और जहाज़ ‘रिच स्टार’ अमेरिकी पाबंदी के बावजूद इस रास्ते से गुज़रा था। इस पूरे विवाद की वजह से समुद्री व्यापार और तेल की सप्लाई पर असर पड़ने का डर है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

चीनी तेल टैंकर पर हमला कब और कहाँ हुआ?

यह हमला 4 मई 2026 को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हुआ, जिसके कारण जहाज़ के डेक पर आग लग गई थी।

अमेरिका ने ईरानी नावों पर हमला क्यों किया?

राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को रास्ता देने और सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ चला रही है, जिसके तहत ईरानी नावों और ड्रोन को निशाना बनाया गया।