Middle East Shipping: मध्य पूर्व के समुद्री रास्तों पर बड़ा संकट, चीन की बड़ी कंपनियों ने रोके तेल टैंकर

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे सुरक्षा खतरों के बीच चीन की दो बड़ी शिपिंग कंपनियों ने फारस की खाड़ी और लाल सागर के अहम समुद्री रास्तों से अपने तेल टैंकरों का सफर पूरी तरह रोक दिया है। COSCO Shipping Energy Transportation और China Merchants Energy Shipping (CMES) नाम की इन सरकारी कंपनियों ने 18 अगस्त 2026 को यह बड़ा कदम उठाया है, जिससे खाड़ी देशों से होने वाले तेल के व्यापार पर सीधा असर पड़ा है। ये दोनों कंपनियां मिलकर चीन के कुल कच्चे तेल का लगभग आधा हिस्सा मध्य पूर्व से लाती थीं और इनके पास 100 से ज्यादा बड़े सुपरटैंकरों का बेड़ा मौजूद है।
समुद्री रास्तों पर सुरक्षा का बढ़ा संकट
चीनी केंद्रीय अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत के बाद इन कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए हैं और अब खाड़ी क्षेत्र के बाहर से ही तेल उठाया जा रहा है। Kpler और अन्य शिप ब्रोकरों से मिली जानकारी के अनुसार, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के फुजैराह बंदरगाह के पास जहाज से जहाज पर तेल ट्रांसफर करने का काम बहुत तेजी से बढ़ गया है। जून और जुलाई के महीनों में यह ट्रांसफर रोजाना 600,000 बैरल से ज्यादा पहुंच गया, जबकि इससे पहले वसंत के मौसम में यह गतिविधि ना के बराबर थी। आने वाले हफ्तों यानी अगस्त से सितंबर के बीच लगभग दो दर्जन COSCO और CMES सुपरटैंकर इन्हीं जगहों पर तेल लोड करने वाले हैं।
शिपिंग कंपनियों का मुनाफा बढ़ा
इस बदलाव की वजह से कंपनियों का मुनाफा काफी ज्यादा बढ़ गया है। ओमान से चीन जाने वाले रूट पर रोजाना का शुद्ध लाभ मार्जिन बढ़कर 110,000 डॉलर हो गया है, जबकि विवाद शुरू होने से पहले यह औसत केवल 30,000 से 40,000 डॉलर के बीच हुआ करता था। दूसरी तरफ, इन महत्वपूर्ण जलडमरूमध्यों से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। 17 अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल तीन कमर्शियल जहाज ही गुजरे, जबकि विवाद से पहले रोजाना औसतन 110 जहाज यहां से निकलते थे। इसी तरह बाब अल-मदब जलडमरूमध्य से केवल 37 जहाजों ने ही अपनी यात्रा पूरी की।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60 दिन का संघर्षविराम 17 अगस्त 2026 को खत्म हो चुका है, जिसके बाद से सुरक्षा को लेकर चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। इसके अलावा यमन के हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी बंदरगाहों के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि उनके बलों ने समुद्री नियमों को लागू करने के लिए 64 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला, तीन जहाजों को नाकाम किया और दो जहाजों पर चढ़कर जांच की। ईरान के बलों द्वारा क्सम द्वीप के पास लाइबेरिया के झंडे वाले टैंकर 'अमारा' पर चढ़ने की भी खबर सामने आई है, हालांकि इसकी पूरी पुष्टि अभी बाकी है। मोचा के पास एक कमर्शियल जहाज पर हूती हमले की भी बात सामने आई है। इन सभी बाधाओं से निपटने के लिए चीन ने आर्कटिक महासागर के रास्ते एक नया 'आइस सिल्क रोड' विकल्प भी शुरू किया है, जिस पर इस हफ्ते से शिपिंग कंपनी सी लीजेंड अपनी नियमित कंटेनर सेवा शुरू करने जा रही है।