Strait of Hormuz में कमर्शियल टैंकर पर ड्रोन से हमला, UAE ने ईरान को ठहराया जिम्मेदार.

फारस की खाड़ी के पास एक बड़ी घटना सामने आई है जहाँ হরমুজ जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz से गुजर रहे एक कमर्शियल टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाया गया। इस हमले में जहाज को हल्का नुकसान पहुंचा है लेकिन गनीमत यह रही कि इस दौरान किसी भी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई और सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि इस हमले के बाद जहाज से किसी भी तरह का तेल या हानिकारक पदार्थ समुद्र में नहीं फैला जिससे बड़ा पर्यावरण संकट टल गया। यह पूरी घटना 13 अगस्त 2026 को हुई जब यह कमर्शियल जहाज समंदर के रास्ते आगे बढ़ रहा था।
UKMTO ने जारी की चेतावनी
इस पूरे मामले की पुष्टि यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने अपने एक नौवहन परामर्श यानी नेविगेशन एडवाइजरी के जरिए की है। यह एडवाइजरी 14 अगस्त 2026 को जारी की गई जिसमें समंदर में सफर कर रहे सभी जहाजों और नाविकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर किसी भी जहाज को आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो वे तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें ताकि समय रहते किसी भी खतरे को टाला जा सके। इस घटना के सामने आने के बाद से ही खाड़ी देशों के समुद्री रूटों पर सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी काफी बढ़ा दी गई है।
UAE सरकार का कड़ा रुख और ईरान पर आरोप
संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने इस हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की है और इसे समुद्री डकैती करार दिया है। देश के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2817 का खुला उल्लंघन बताया है और इसे सरासर समुद्री डकैती की संज्ञा दी है। यूएई सरकार ने इस कायराना हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों का कहना है कि मर्चेंट जहाजों को इस तरह से निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र की शांति पर बुरा असर पड़ रहा है। इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं।
क्षेत्रीय तनाव और पहले की घटनाएं
खाड़ी देशों में इन दिनों तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है और इस तरह की घटनाएं सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर रही हैं। यह ताजा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव की स्थिति है और इससे पहले भी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े जहाजों पर इस तरह के हमले हो चुके हैं। पिछले मामलों में जहाजों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ जानमाल का भी नुकसान हुआ था। इस तरह की बार-बार होने वाली घटनाओं से न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि वहां काम करने वाले कामगारों और नाविकों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया है। भारत और अन्य देशों से बड़ी संख्या में लोग इन इलाकों में काम करने के लिए आते हैं इसलिए इस तरह के हालात वहां रहने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का विषय बन जाते हैं।