यूक्रेन युद्ध पर क्रीमियाई संसद प्रमुख का बड़ा बयान, 'कोएलिशन ऑफ विलिंग' के कारण शांति समझौते में हो रही है देरी

Praggya Singh sabal26 August 20263 min read40 viewsWorld
यूक्रेन युद्ध पर क्रीमियाई संसद प्रमुख का बड़ा बयान, 'कोएलिशन ऑफ विलिंग' के कारण शांति समझौते में हो रही है देरी

यूक्रेन में चल रहे सैन्य संघर्ष को लेकर क्रीमियाई संसद के प्रमुख व्लादिमीर कोंस्टेंटिनोव ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि तथाकथित 'कोएलिशन ऑफ विलिंग' द्वारा यूक्रेन में सैन्य टुकड़ियां तैनात करने की योजनाओं से जुड़ी घोषणाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसकी वजह से इस गंभीर संघर्ष को खत्म होने में भारी देरी हो रही है। उनके मुताबिक पश्चिमी देशों की इन तमाम हरकतों और बयानों की वजह से संभावित शांति समझौते की राह बेहद मुश्किल होती जा रही है और युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है।

रूसी एजेंसी को दिया गया इंटरव्यू

मिली जानकारी के अनुसार, क्रीमियाई संसद के प्रमुख व्लादिमीर कोंस्टेंटिनोव ने रूस की प्रसिद्ध समाचार एजेंसी रिया नोवोस्ती के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान यह तमाम बातें साझा कीं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस गठबंधन की तरफ से बार-बार यूक्रेन में सैनिक भेजने की जो बात कही जा रही है, वह असल में संघर्ष को समाप्त करने के सभी ईमानदारी भरे प्रयासों में सीधे तौर पर बाधा डालने का एक बड़ा तरीका है। उनके अनुसार पश्चिमी देशों की मंशा इस युद्ध को जल्दी रोकने की बिल्कुल नहीं है, बल्कि वे किसी न किसी बहाने से इस युद्ध को लगातार लंबा खींचना चाहते हैं।

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का सैन्य अभ्यास का प्रस्ताव

दूसरी तरफ इस मामले में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सोमवार को एक बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने बताया कि 'कोएलिशन ऑफ विलिंग' संगठन यूक्रेन में भविष्य की संभावित तैनाती के लिए अपने सैनिकों को पूरी तरह तैयार करने के उद्देश्य से एक विशेष सैन्य अभ्यास आयोजित करेगा। इस प्रस्ताव के तहत यह योजना बनाई गई है कि जैसे ही रूस और यूक्रेन के बीच कोई युद्धविराम समझौता होता है, उसके तुरंत बाद इन विदेशी सैनिकों को यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में उतार दिया जाएगा ताकि सुरक्षा व्यवस्था को संभाला जा सके।

पश्चिमी देशों की रणनीति पर उठे सवाल

क्रीमियाई संसद के प्रमुख ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस दावे पर कड़ा एराज जताते हुए कहा कि असलियत में किसी भी देश की तरफ से अपने सैनिकों को यूक्रेन के रणक्षेत्र में भेजने की कोई भी ठोस या पक्की योजना नहीं है। उनका यह मानना है कि केवल सैन्य तैनाती की झूठी चर्चाएं फैलाकर पश्चिमी देश अपने उन बड़े और छिपे हुए रणनीतिक उद्देश्यों को दुनिया की नजरों से छिपाने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें वे लंबे समय से पूरा करना चाहते थे।

क्या है 'कोएलिशन ऑफ विलिंग' संगठन

आपको बता दें कि इस 'कोएलिशन ऑफ विलिंग' नामक संगठन में इस समय दुनिया के 30 से अधिक देश शामिल हो चुके हैं। इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत मुख्य रूप से फ्रांस और ब्रिटेन के संयुक्त नेतृत्व में की गई थी। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य यह बताया गया है कि वे आने वाले समय में यूक्रेन के लिए एक मजबूत और संभावित सुरक्षा व्यवस्था तैयार करें ताकि रूस के खिलाफ उसे लंबे समय तक टिकाया जा सके।

रूस के विदेश मंत्रालय का कड़ा विरोध

इस पूरे घटनाक्रम पर रूस का रुख बेहद सख्त बना हुआ है। रूस के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन की धरती पर नाटो सदस्य देशों के सैनिकों की किसी भी प्रकार की संभावित तैनाती का कड़ा विरोध किया है। मंत्रालय का साफ कहना है कि यदि ऐसा कोई भी कदम उठाया जाता है तो इससे इस पूरे क्षेत्र में तनाव बहुत तेजी से बढ़ जाएगा और हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। रूसी प्रशासन पहले भी ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों द्वारा गठबंधन सैनिकों को भेजने की बातों को युद्ध को हवा देने और उकसावे की कार्रवाई करार दे चुका है।

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