कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के नीचे आई, अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए दी 30 दिन की छूट
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका की तरफ से रूसी तेल को खरीदने के लिए एक खास परमिट मिलने के बाद तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गए हैं। सऊदी अरब की न्यूज़ एजेंसी Akhbar 24 की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच यह एक बड़ी राहत है। Brent Crude का भाव गिरकर लगभग 99.75 डॉलर पर आ गया है, जो काफी समय बाद इस स्तर पर पहुंचा है।
अमेरिका का नया नियम और 30 दिन की छूट
US Treasury Department ने दुनिया भर के बाज़ार को राहत देने के लिए General License 134 जारी किया है। इसके तहत रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को खरीदने और डिलीवरी करने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी गई है। यह परमिट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगा। नियम के मुताबिक यह परमिट सिर्फ उसी तेल के लिए है जो 12 मार्च 2026 से पहले जहाजों पर लोड हो चुका है। इससे किसी भी नए ऑर्डर को मंगाने की अनुमति नहीं दी गई है।
कच्चे तेल के भाव और IEA का फैसला
इस फैसले के तुरंत बाद बाज़ार में तेल के दाम नीचे आ गए। Brent Crude 99.75 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। वहीं WTI की कीमत 94.85 से 95.73 डॉलर के बीच चल रही है। कीमतों को और कम करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी अपने रिज़र्व से 400 मिलियन बैरल तेल निकालने का फैसला किया है। इसमें से 172 मिलियन बैरल तेल अमेरिका अपने पास से दे रहा है। US Treasury Secretary Scott Bessent ने कहा कि यह एक छोटा कदम है जिससे बाज़ार को स्थिर किया जा सके।
गल्फ और आम लोगों पर क्या होगा असर
ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमत कम होने से महंगाई पर लगाम लगने की उम्मीद है। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां काम करने वाले भारतीयों के लिए तेल की कीमतों का स्थिर होना एक अच्छी खबर है। इससे वहां की अर्थव्यवस्था सामान्य रहती है और रोजगार के मौके बने रहते हैं। हालांकि जानकारों का मानना है कि असल दिक्कत अभी भी खत्म नहीं हुई है। Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही अभी भी सबसे बड़ी परेशानी है जिसे हल करना बहुत जरूरी है।




