अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए अपने सुरक्षित भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में तेल निकालने का प्रस्ताव दिया है। इस खबर के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। 11 मार्च 2026 को हुई इस घोषणा से खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों और दुनिया भर के तेल बाजारों पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों और सुरक्षित भंडार से तेल रिलीज होने की खबर ने बाज़ार में स्थिरता लाने का काम किया है।

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कच्चे तेल की कीमतों में कितनी गिरावट आई है?

बाज़ार में Brent Crude की कीमत गिरकर लगभग 87.84 डॉलर से 87.91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं WTI Crude भी 83.28 डॉलर से 84.43 डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। ओमान क्रूड जो सोमवार को 124.68 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था, अब उसमें भी कमी देखी जा रही है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए तेल की कीमतों में यह कमी महंगाई कम होने का संकेत हो सकती है।

विवरण जानकारी
Brent Crude भाव 87.84 डॉलर – 87.91 डॉलर
WTI Crude भाव 83.28 डॉलर – 84.43 डॉलर
प्रस्तावित तेल निकासी 182 मिलियन बैरल से अधिक
ओमान क्रूड (सोमवार का भाव) 124.68 डॉलर
IEA सदस्य देश 32 देश

IEA के इस बड़े फैसले के मुख्य बिंदु क्या हैं?

  • IEA के 32 सदस्य देशों ने तेल संकट से निपटने के लिए आपातकालीन बैठक की है।
  • इस योजना के तहत 2022 में जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से भी ज्यादा तेल बाज़ार में उतारा जाएगा।
  • IEA सदस्य देशों के पास वर्तमान में लगभग 1.2 बिलियन बैरल का सरकारी सुरक्षित भंडार मौजूद है।
  • G7 देशों के ऊर्जा मंत्री भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और मिलकर कदम उठा रहे हैं।
  • अगर कोई भी सदस्य देश आपत्ति नहीं करता है, तो तेल की निकासी तुरंत शुरू कर दी जाएगी।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 जहाजों को नष्ट करने की सूचना दी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। खाड़ी देशों में तेल उत्पादन में जो कमी आई थी, उसे पूरा करने के लिए यह रणनीतिक भंडार बहुत काम आएगा।