अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। तेल की कीमतें अब गिरकर प्रति बैरल 90 डॉलर से नीचे आ गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता जल्द ही हो सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि ईरान के साथ एक शांति समझौता काफी करीब है। उनके इस सकारात्मक रुख के बाद बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर पैदा हुआ डर काफी कम हो गया। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अचानक 5 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई और भाव 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया। इस समझौते से खाड़ी देशों और वैश्विक बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
ईरान और इसराइल के बीच युद्धविराम की क्या स्थिति है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और इसराइल के बीच हुआ युद्धविराम फिलहाल काफी नाजुक स्थिति में है। इसराइल और अमेरिका के बीच भी कुछ मतभेद सामने आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी देते हुए सावधान रहने की सलाह दी है और कहा है कि लगातार हमलों से शांति समझौते की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी तरफ, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा है कि अमेरिका असल में बातचीत या युद्धविराम नहीं चाहता है, इसलिए ईरान अपने लोगों की सुरक्षा के लिए कड़ा कदम उठाएगा।
इस समझौते का वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिल सकती है। कच्चे तेल के दाम गिरने से भारत जैसे आयात करने वाले देशों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी तनाव पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। लेबनान के टायर शहर में इसराइली हमलों के कारण बनी अशांत स्थिति पर दुनिया भर के देशों की नजर बनी हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कच्चे तेल की कीमतों में कितनी गिरावट दर्ज की गई है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते वाले बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी की कमी आई है, जिससे इसकी कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है।
ईरान के मुख्य वार्ताकार ने शांति समझौते पर क्या कहा है?
ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका न तो युद्धविराम चाहता है और न ही बातचीत करना चाहता है, इसलिए ईरान को अपने अधिकारों की रक्षा खुद करनी होगी।
