Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतें अब कम नहीं होंगी, भारत को देना होगा 70 अरब डॉलर ज़्यादा

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतें अब वापस पुराने स्तर यानी 65 डॉलर प्रति बैरल पर नहीं आएंगी। इसका सीधा असर भारत की जेब पर पड़ेगा और आने वाले महीनों में आयात बिल काफी बढ़ सकता है।

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तेल की कीमतों से भारत के खर्च पर कितना असर पड़ेगा?

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत के खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा। अलग-अलग संस्थाओं ने इसके प्रभाव को लेकर अपने आंकड़े दिए हैं:

संस्था असर या अनुमान
Prabhudas Lilladher सालाना आयात बिल 70 अरब डॉलर बढ़ सकता है
CareEdge Ratings 10 डॉलर की बढ़त पर 20 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च
Rubix Data Sciences 10 डॉलर की बढ़त पर 13-14 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च
IMF 2026 में तेल की कीमतों में 21.4% की बढ़ोतरी

दुनिया में क्या हालात हैं और आगे क्या होगा?

IMF ने अनुमान लगाया है कि 2026 में तेल की कीमतों में उछाल आएगा, जिससे भारत का Current Account Deficit (CAD) बढ़कर 2.0% हो जाएगा। अमेरिका ने भी ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील न देने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इस बीच, भारत ने अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है, जिसमें मार्च के दौरान 148% की भारी बढ़ोत्तरी देखी गई।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या जोखिम हैं?

RBI और चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने माना है कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरी है। तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ सकती है और रुपये की कीमत पर दबाव आ सकता है। CareEdge का अनुमान है कि अगर तेल 90 डॉलर प्रति बैरल रहता है, तो FY27 में CAD बढ़कर 2.1% हो सकता है। इस स्थिति को संभालने के लिए RBI ने बैंकों और डीलरों को रुपये की उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के निर्देश दिए हैं।