मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बिगड़ते हालातों और सैन्य हमलों की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में 7% तक की भारी तेजी देखी गई है। 29 जुलाई 2026 को ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) के दाम अचानक बढ़ गए, जिससे वैश्विक बाजारों में खलबली मच गई है। यह उछाल उस समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष फिर से शुरू हो गया है।
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तनाव की मुख्य वजह
अमेरिकी सेना की CENTCOM ने बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 28 जुलाई को जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाने की कोशिश की, जिन्हें सफलतापूर्वक रोका गया। इसके जवाब में अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर स्ट्राइक की। साथ ही, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकर NCC Ghazal पर मिसाइल हमले का दावा किया है। इसके अलावा, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तीन तेल टैंकरों को रोकने का भी दावा किया है।
तेल की कीमतों पर असर
इस अनिश्चितता के कारण तेल के दामों में उतार-चढ़ाव जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव के चलते कीमतें $80 से $100 प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं।
| क्रूड ऑयल का प्रकार | कीमत (प्रति बैरल) |
|---|---|
| Brent Crude | $89.79 – $90 |
| WTI Crude | $84.5 |
अमेरिकी डेटा के अनुसार, पिछले हफ्ते अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में 3.3 मिलियन बैरल की गिरावट दर्ज की गई, जिसने आपूर्ति की चिंता को और बढ़ा दिया है।
