दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने Justice Swarana Kanta Sharma से केस से हटने की मांग की थी। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि अदालत को धारणाओं का थिएटर नहीं बनाया जा सकता। इस फैसले के जरिए कोर्ट ने न्यायिक स्वतंत्रता को फिर से मजबूत किया है और स्पष्ट किया कि केवल शक के आधार पर जज को नहीं हटाया जा सकता।

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कोर्ट ने केजरीवाल की अर्जी क्यों खारिज की?

कोर्ट ने कहा कि जज के खिलाफ पूर्वाग्रह के आरोप सिर्फ अटकलों पर आधारित थे और कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरे। Justice Swarana Kanta Sharma ने स्पष्ट किया कि न्यायिक निष्पक्षता एक मान्यता है जिसे ठोस सबूतों से ही चुनौती दी जा सकती है, केवल व्यक्तिगत धारणा से नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी राजनेता को न्यायिक योग्यता तय करने या बिना आधार के संस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अरविंद केजरीवाल ने क्या दलीलें दी थीं?

Kejriwal ने अपनी अर्जी में कई बातें रखी थीं। उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा ने उनके और अन्य आरोपियों जैसे Manish Sisodia और K. Kavitha के खिलाफ पहले कड़े आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जज आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं के कार्यक्रमों में शामिल हुई हैं और उनके बच्चे केंद्र सरकार के वकील हैं। हालांकि, कोर्ट ने इन बातों को खारिज करते हुए कहा कि पेशेवर कार्यक्रमों में हिस्सा लेना या रिश्तेदारों का सरकारी वकील होना पक्षपात का आधार नहीं हो सकता।

केस से जुड़ी मुख्य जानकारियां

विवरण जानकारी
फैसले की तारीख 20 अप्रैल 2026
संबंधित कोर्ट Delhi High Court
मुख्य जज Justice Swarana Kanta Sharma
याचिकाकर्ता Arvind Kejriwal
विपक्षी दल CBI (Solicitor General Tushar Mehta)
केस का विषय एक्साइज पॉलिसी केस (Recusal Plea)
कोर्ट का निर्णय याचिका खारिज
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.