दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी विश्वविद्यालय में हुई जालसाजी और कई तरह की वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि सिद्दीकी को कोर्ट में पेश करने के बाद 4 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

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किन आरोपों में हुई है यह कार्रवाई?

यह पूरी कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर की गई है। यूजीसी ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज करवाई थीं। जांच में पता चला है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी मान्यता और संचालन को लेकर कई फर्जी दावे किए थे।

  • विश्वविद्यालय ने NAAC से मान्यता (Accreditation) प्राप्त होने का झूठा दावा किया था।
  • फर्जी दस्तावेजों के जरिए रिकॉर्ड्स में हेराफेरी की गई थी।
  • नवंबर 2025 में फर्जीवाड़े की बात सामने आने पर वेबसाइट को बंद कर दिया गया था।

आतंकी कनेक्शन और ED की जांच

जावेद अहमद सिद्दीकी और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सिर्फ धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि इससे भी गंभीर आरोप लगे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए कार धमाके के तार यूनिवर्सिटी से जुड़े मिले थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग की जांच कर रहा है।

जांच में सामने आया कि लाल किला धमाके में शामिल आरोपी डॉ. उमर नबी यूनिवर्सिटी में कार्यरत था। इसके अलावा डॉ. मुजम्मिल शकील जैसे अन्य संदिग्ध भी संस्थान से जुड़े थे, जिन्हें ‘व्हाइट-कॉलर’ टेरर नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है। ED ने पहले ही सिद्दीकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है और यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को जब्त किया है।