दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) ने अपने डेटा प्रोटेक्शन नियमों में बदलाव के लिए एक चर्चा प्रक्रिया शुरू की है। इसका मुख्य मकसद नए जमाने की टेक्नोलॉजी और AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को देखते हुए नियमों को अपडेट करना है। इस नए प्रस्ताव पर सुझाव देने के लिए 18 जुलाई 2026 तक का समय दिया गया है।
यह पूरी प्रक्रिया 18 जून 2026 को शुरू हुई थी, जिसे कंसल्टेशन पेपर नंबर 3 ऑफ 2026 के जरिए बताया गया। इसमें सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि जब AI सिस्टम के जरिए लोगों का पर्सनल डेटा प्रोसेस किया जाए, तो उसकी सुरक्षा और गवर्नेंस कैसे मजबूत की जाए।
नियमों में क्या बदलाव होंगे
प्रस्तावित बदलावों में कुछ मुख्य बातें शामिल हैं:
- नियम 10 में बदलाव: इसे अपडेट किया जाएगा ताकि AI का इस्तेमाल करने वाले सिस्टम में सुरक्षा और सेफ्टी के कड़े इंतजाम हों।
- नया नियम 11: एक नया नियम लाने का प्रस्ताव है, जिससे डेटा प्रोटेक्शन कमिश्नर को सर्टिफिकेट और मान्यता देने वाले फ्रेमवर्क को पहचानने का अधिकार मिलेगा।
- ASO की भूमिका: ऑटोनॉमस सिस्टम्स ऑफिसर (ASO) के काम और उसकी जिम्मेदारियों को लेकर नियमों में और ज्यादा स्पष्टता लाई जाएगी।
DIFC अथॉरिटी के चीफ लीगल ऑफिसर Jacques Visser ने बताया कि AI और डेटा सिस्टम बहुत तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमों का ऐसा होना जरूरी है जो व्यावहारिक हों, साफ हों और समय के साथ बदल सकें, ताकि जवाबदेही और गवर्नेंस के ऊंचे स्टैंडर्ड बने रहें।
पुराने नियमों और कानून में अंतर
यहाँ यह समझना जरूरी है कि ये बदलाव सिर्फ डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन में किए जा रहे हैं, न कि मुख्य डेटा प्रोटेक्शन कानून (Law No. 5 of 2020) में। बता दें कि मुख्य कानून में पहले ही 8 जुलाई 2025 को कुछ बड़े बदलाव किए जा चुके हैं, जो 15 जुलाई 2025 से लागू हुए थे। उन बदलावों में डेटा लीक होने पर जुर्माना बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा ट्रांसफर के नियमों को अपडेट करना शामिल था।
DIFC मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण एशिया (MEASA) क्षेत्र का एक बड़ा फाइनेंशियल हब है। इसलिए वह अपनी गवर्नेंस को लगातार सुधार रहा है ताकि डेटा की सुरक्षा और काम करने के तरीके में पारदर्शिता बनी रहे।
