दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) ने अपने आर्बिट्रेशन कानून में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का मकसद कानूनी विवादों को सुलझाने के तरीके को आधुनिक बनाना और उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर लाना है। इससे दुबई में बिजनेस करने वाले लोगों और कंपनियों को अपने विवाद जल्द सुलझाने में मदद मिलेगी।

कानून में क्या-क्या बदलाव होंगे

DIFC ने इस कानून को सुधारने के लिए कई नए सुझाव दिए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है। प्रस्तावित बदलावों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • ट्रिब्यूनल की शक्तियों को पहले से ज्यादा बढ़ाया जाएगा।
  • इमरजेंसी आर्बिट्रेटर के फैसलों को लागू करना अब आसान होगा।
  • विवादों को बातचीत से सुलझाने के लिए एक नया मेडिएशन फ्रेमवर्क लाया जाएगा।
  • थर्ड-पार्टी फंडिंग के लिए नए रेगुलेटरी नियम बनाए जाएंगे।
  • कोर्ट द्वारा अंतरिम उपायों के लागू होने के तरीके को और स्पष्ट किया जाएगा।
  • फैसलों को चुनौती देने के लिए तय समय सीमा को कम किया जाएगा।
  • प्रोसिडिंग्स के एकीकरण और पार्टियों को जोड़ने जैसे नए टूल्स दिए जाएंगे।

अधिकारियों ने क्या कहा

DIFC अथॉरिटी के चीफ लीगल ऑफिसर Jacques Visser ने इस पब्लिक कंसल्टेशन की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि ये सुधार सिस्टम की कार्यक्षमता को बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से DIFC दुनिया के एक प्रमुख इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन हब के रूप में अपनी जगह और मजबूत कर सकेगा।

जनता की राय और समय सीमा

इन प्रस्तावित नियमों पर सुझाव लेने के लिए 30 दिन का समय तय किया गया है। लोग 10 जुलाई 2026 तक अपनी राय और कमेंट्स भेज सकते हैं। यह पूरा बदलाव 2008 में बने पुराने आर्बिट्रेशन कानून को अपडेट करने के लिए किया जा रहा है ताकि यह इंग्लैंड, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों के आधुनिक कानूनों के साथ मेल खा सके।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.