दक्षिणी लेबनान में फंसा शांति समझौता, अमेरिका और इसराइल की पायलट ज़ोन में जांच जारी.

Sushma Kumari19 August 20262 min read31 viewsWorld
दक्षिणी लेबनान में फंसा शांति समझौता, अमेरिका और इसराइल की पायलट ज़ोन में जांच जारी.

दक्षिणी लेबनान के संवेदनशील इलाकों में कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 19 अगस्त 2026 को अल जज़ीरा के पत्रकार अली हाशेम ने दक्षिणी लेबनान के पायलट ज़ोन की ताजा स्थिति साझा की है। ये क्षेत्र जून 2026 के उस फ्रेमवर्क समझौते का अहम हिस्सा हैं, जिसे अमेरिका, इसराइल और लेबनान के बीच तय किया गया था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य विदेशीobservers को तैनात करके हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर रोक लगाना और उनकी गैर-मौजूदगी को सत्यापित करना था।

समझौते की शर्तें और जमीनी हकीकत

इस फ्रेमवर्क समझौते के तहत कई बड़े कदम उठाए जाने थे, जिसमें इसराइल की क्रमिक वापसी, लेबनान की सेना को इन इलाकों की पूरी कमान सौंपना और गैर-सरकारी हथियारों को पूरी तरह हटाना शामिल था। हालांकि, सैन्य सूत्रों का कहना है कि सत्यापन तंत्र को लागू करने का काम अभी भी पूरी तरह रुका हुआ है। 2026 के इन हालात में जमीनी स्तर पर इसराइल के पीछे हटने का कोई भी सबूत सामने नहीं आया है और न ही इन इलाकों का दायरा बढ़ाया गया है। पायलट ज़ोन के तहत शुरुआती चरण की शुरुआत जुलाई 2026 में फ्रौन, श्रीफा और ज़वतारा अल-ग़र्बिया जैसे चुनिंदा इलाकों में की गई थी। इस अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र के लिए ब्रिटेन, इटली, स्विट्जरलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों के नाम पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन इनकी भागीदारी को लेकर अभी तक कोई भी अंतिम समझौता नहीं हो सका है।

विभिन्न पक्षों की कड़ी प्रतिक्रियाएं

हिजबुल्लाह ने इस जून 2026 के फ्रेमवर्क को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने इसराइली सैन्य कार्रवाइयों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही है और लेबनान सरकार से उन वार्ताओं को तुरंत रोकने की अपील की है जिन्हें वे अपमानजनक मानते हैं। इसके विपरीत, इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने साफ किया है कि इसराइली रक्षा बल यानी आईडीएफ क्षेत्र में भूमिगत बुनियादी ढांचे और घरों को नष्ट करने का काम लगातार जारी रखे हुए हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने भी इसराइली सैन्य कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे हस्ताक्षरित समझौते का खुला उल्लंघन बताया है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने इस मामले पर बात करते हुए हाल ही में यह स्पष्ट किया था कि दक्षिणी लेबनान में किसी भी तरह की स्थायी सैन्य मौजूदगी इस समझौते की शर्तों के बिल्कुल खिलाफ है। राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल मेयर जैसे अकादमिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसराइल इन पायलट ज़ोन को तुरंत पीछे हटने के बजाय हिजबुल्लाह के स्थानीय प्रभाव को कमजोर करने के एक बड़े रणनीतिक हथियार के रूप में देख रहा है।

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