भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट आ रही है और यह जल्द ही 100 रुपये प्रति डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। हाल ही में डॉलर की बढ़ती मांग और मध्य पूर्व में तनाव के कारण रुपये पर दबाव बहुत बढ़ गया है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत में रह रहे उनके परिवारों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
रुपये को 100 के स्तर से बचाने के लिए RBI ने क्या कदम उठाए हैं?
RBI ने बाजार में डॉलर की कमी को दूर करने के लिए भारी हस्तक्षेप किया है। 22 मई 2026 को केंद्रीय बैंक ने बाजार में लगभग 2 से 5 अरब डॉलर बेचे, जो सामान्य दिनों में 1 अरब डॉलर के दैनिक औसत से काफी अधिक है। इसके अलावा, RBI 26 मई से 5 अरब डॉलर की स्वैप नीलामी शुरू करने की योजना बना रहा है ताकि बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाई जा सके। मार्च 2026 में भी बैंकों के ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाजार में निवेश पर रोक लगाई गई थी ताकि रुपये को अस्थिर होने से बचाया जा सके।
रुपये के कमजोर होने के मुख्य कारण क्या हैं और प्रवासियों पर क्या असर होगा?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे देश का चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ रहा है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने और मजबूत होते डॉलर इंडेक्स के कारण भी रुपये की सेहत बिगड़ी है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए डॉलर मजबूत होने से भारत पैसा भेजने पर अधिक रुपये मिलेंगे, लेकिन भारत में आयातित सामान और महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।
विशेषज्ञों और सरकार का इस स्थिति पर क्या कहना है?
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने RBI को सलाह दी है कि रुपये को गिरने दिया जाए और इसे 100 के स्तर को भी पार करने दिया जाए, क्योंकि उनका मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करके रुपये को बचाना सही रणनीति नहीं होगी। दूसरी तरफ, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। आनंद राठी शेयर्स के विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा, तो रुपया 102 तक भी गिर सकता है।
| विवरण (Details) | आंकड़े (Data) |
|---|---|
| 22 मई 2026 को बंद विनिमय दर | 95.5890 रुपये प्रति डॉलर |
| 24 मई 2026 को विनिमय दर | 95.81 रुपये प्रति डॉलर |
| RBI द्वारा बाजार में डॉलर की बिक्री (22 मई) | 2 से 5 अरब डॉलर |
| आगामी स्वैप नीलामी की राशि (26 मई) | 5 अरब डॉलर |
| भारत की तेल आयात पर निर्भरता | 85% से 90% |
Frequently Asked Questions (FAQs)
भारतीय रुपये में आ रही गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में तनाव की वजह से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों द्वारा भारत से पैसा निकालना और मजबूत होता डॉलर इंडेक्स है। भारत अपनी जरूरत का 85-90% तेल आयात करता है, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ रहा है।
रुपये की गिरावट को रोकने के लिए RBI क्या कदम उठा रहा है?
RBI बाजार में सीधे डॉलर बेचकर हस्तक्षेप कर रहा है। हाल ही में 2 से 5 अरब डॉलर की बिक्री की गई है और 26 मई से 5 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी शुरू की जा रही है ताकि बाजार में सट्टेबाजी को शांत किया जा सके।