अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पूरी ताकत के साथ जारी है. 16 मार्च 2026 को दिए गए बयान में ट्रंप ने साफ किया कि ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक खत्म कर दिया गया है. इस बीच दुबई में भी हमले का असर दिखा है, जिससे गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और यात्रियों की चिंता बढ़ गई है. अमेरिका के सेंट्रल कमांड और इजराइल की सेना (IDF) दोनों मिलकर इस ऑपरेशन को चला रहे हैं.
ईरान पर हमले के ताज़ा हालात क्या हैं?
ट्रंप के अनुसार इस सैन्य अभियान का नाम ‘Operation Epic Fury’ रखा गया है. इस ऑपरेशन के तहत ईरान के कई अहम ठिकानों को तबाह कर दिया गया है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप से बात की है और इस अभियान को अपना समर्थन दिया है. अमेरिकी और इजराइली सेना ने मिलकर कई बड़े नुकसान किए हैं.
- ईरान में अब तक 7,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है.
- नौसेना के 100 से अधिक समुद्री जहाजों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है.
- ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है.
- तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के विमान को नष्ट कर दिया गया है.
दुबई और प्रवासियों पर इसका क्या असर हुआ?
गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति थोड़ी परेशान करने वाली है. पिछले 24 घंटों में दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल डिपो पर ड्रोन से हमला हुआ. इस हमले के बाद वहां भयानक आग लग गई, जिसके कारण एयरपोर्ट से उड़ने वाली कई फ्लाइट्स को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था. इसके अलावा इस तनाव का असर सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट पर पड़ा है. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिसका असर जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिख सकता है.
अमेरिका की आगे की क्या रणनीति है?
अमेरिका इस ऑपरेशन को अभी रोकने के मूड में नहीं है और ईरान की तरफ से भी सीजफायर को लेकर कोई बात नहीं की गई है. अमेरिका मध्य पूर्व में अपने 5,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है. ट्रंप ने ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया से अपील की है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजें. इस बीच अमेरिकी सरकार ने अपने सभी नागरिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से मध्य पूर्व छोड़ने की सलाह दी है. ब्रिटेन ने भी अमेरिका को अपनी बेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है, लेकिन यह केवल रक्षा के काम में उपयोग होगी.
