अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump बीजिंग पहुंच चुके हैं जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से होगी. यह करीब एक दशक में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है. इस दो दिवसीय दौरे के दौरान अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के खिलाफ लड़े जा रहे युद्ध पर बातचीत होने की उम्मीद है.

Donald Trump की बीजिंग यात्रा और साथ कौन है

President Donald Trump 13 मई 2026 की शाम को बीजिंग पहुंचे. उनका स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति Han Zheng और विदेश मंत्री Ma Zhaoxu ने रेड कार्पेट और सैन्य बैंड के साथ किया. इस यात्रा में उनके साथ बड़े बिजनेस लीडर्स भी गए हैं, जिनमें Tesla के Elon Musk, Apple के Tim Cook और Nvidia के Jensen Huang शामिल हैं. साथ ही उनके बेटे Eric Trump और बहू Lara Trump भी इस दौरे का हिस्सा हैं. व्हाइट हाउस ने इस पूरे डेलीगेशन की पुष्टि की है.

ईरान युद्ध और अर्थव्यवस्था पर असर

इस मुलाकात के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के साथ चल रहा युद्ध है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था. राष्ट्रपति Trump ने बयान दिया कि उनकी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान फिलहाल नियंत्रण में है. इस युद्ध की वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है. अप्रैल 2026 में थोक कीमतें 6 प्रतिशत बढ़ गईं, जिसका मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत है. अब तक इस युद्ध पर अमेरिकी टैक्सपेयर्स का करीब 29 अरब डॉलर खर्च हो चुका है, जो 50 अरब डॉलर तक जा सकता है.

बातचीत के अन्य मुख्य मुद्दे

ईरान युद्ध के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर भी चर्चा होगी. Trump ने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे मजबूत सैन्य देश है और चीन दूसरे नंबर पर है. वह चीन को अमेरिकी व्यापार के लिए और अधिक खोलने का प्रयास करेंगे. वहीं दूसरी तरफ, लेबनान में UNIFIL ने रिपोर्ट किया कि हिजबुल्लाह के ड्रोन उनके मुख्यालय के पास फटे हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

Donald Trump की बीजिंग यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है

मुख्य उद्देश्य चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से मिलना, व्यापारिक रिश्तों को सुधारना और ईरान के साथ चल रहे युद्ध जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करना है.

ईरान युद्ध का अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है

युद्ध के कारण ऊर्जा लागत बढ़ी जिससे अप्रैल 2026 में थोक कीमतें 6 प्रतिशत बढ़ गईं और अब तक करीब 29 से 50 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है.