अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भरोसा जताया है कि कल यानी 6 अप्रैल 2026 तक ईरान के साथ एक समझौते पर सहमति बन जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz को लेकर तनाव चरम पर है। Trump ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर तय समय के भीतर समझौता नहीं हुआ तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। फिलहाल सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की नजरें इस बातचीत के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

ट्रम्प की चेतावनी और समझौते की शर्तों में क्या है खास?

Donald Trump ने अपनी शर्तों को लेकर बहुत कड़ा रुख अपनाया है और ईरान को 48 घंटे की मोहलत दी थी। उन्होंने साफ कहा है कि अगर 6 अप्रैल की रात 8 बजे तक कोई रास्ता नहीं निकला, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। बातचीत के बीच ही Trump ने ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान के दूसरे क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लेने की जानकारी भी दी है। उनका कहना है कि बातचीत अच्छी चल रही है इसलिए उन्होंने पहले दी गई मोहलत को 6 अप्रैल तक बढ़ाया था।

खाड़ी देशों की स्थिति और ईरान का अब तक का जवाब

  • ईरान ने Trump की शर्तों को मानने से इनकार किया है और इसे एक दबाव बनाने वाली राजनीति बताया है।
  • Kuwait ने रिपोर्ट दी है कि उसके ऊर्जा ठिकानों और सरकारी इमारतों पर ईरान की तरफ से हमले हुए हैं।
  • Saudi Arabia ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और सैन्य अभियान को जारी रखने की बात कही है।
  • Iran ने Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर कड़े नियम लागू किए हैं लेकिन Iraq को इससे छूट दी है।
  • US और Israel की तरफ से ईरान के भीतर कुछ सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक की खबरें भी सामने आई हैं।
  • यह पूरा विवाद 2018 में अमेरिका के परमाणु समझौते से बाहर होने के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है।
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.